By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: Dronagiri village Hanuman : दो युगों बाद भी हनुमान जी से क्‍यों नाराज है एक गांव
Share
Notification Show More
Latest News
रंगों की चादर ओढ़कर सैलानियों के स्वागत को तैयार फूलों की घाटी
करियर
सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को मिलेगी नई पहचान: मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड
बिना अनुमति संचालित मस्जिद-मदरसा भवन पर एमडीडीए की कार्रवाई, भवन किया सील
उत्तराखंड
Himalaya की वादियों में नीति घाटी में 933 धावकों ने लिखी नई कहानी
उत्तराखंड
तीन घन्टे तक रुकी रही केदारनाथ यात्रा 
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > Dronagiri village Hanuman : दो युगों बाद भी हनुमान जी से क्‍यों नाराज है एक गांव
उत्तराखंड

Dronagiri village Hanuman : दो युगों बाद भी हनुमान जी से क्‍यों नाराज है एक गांव

Web Editor
Last updated: 2025/08/02 at 2:56 AM
Web Editor
Share
4 Min Read
SHARE

Dronagiri Village in Uttarakhand Still Holds a Grudge Against Lord Hanuman

Dronagiri village Hanuman : कुदरत के मोहक संसार में बसेे द्रोणागिरी गांव की अनूठी कहानी

Dronagiri village Hanuman :  देहरादून, 1 अगस्‍त 2025 :  द्रोणागिरी गांव हनुमान जी से नाराज है। युग बदल गए, त्रेता के बाद द्वापर और अब कलियुग। नाराजगी है कि बदस्‍तूर जारी है, क्‍यो ? यह भी बताते हैं, लेकिन पहले थोडा भूूूूमिका बना लें। चमोली जिले में चीन सीमा पर स्थित नीती घाटी में फैले कुदरत के मोहक संसार में बसता है द्रोणागिरी। एक ओर हिमालय की धवल चोटियां तो दूसरी ओर दूर तक फैली हरियाली, एक अनूठा सम्‍मोहन पैदा करती है। सामने सिर उठाए खडा द्रोणागिरी पर्वत इस गांव के लिए सिर्फ एक पहाड नहीं, बल्कि ईष्‍ट देवता हैं। यानी प्रकृति का संरक्षण उन्‍हें विरासत में मिला उपहार हैै, जो सदियों से उनके डीएनए में समाहित हो चुका है।

समुद्रतल से 12000 फीट की ऊंचाई पर बसे द्रोणागिरी गांव तक पहुंचना आसान नहीं है। ऋषिकेश से जोशीमठ तक  256 किमी की यात्रा के बाद जुम्‍मा तक 50 किमी की दूरी और तय करनी होती है। जुमा से साढे छह किलोमीटर लंबी कच्‍ची सडक पर चलने के बाद शुरू होती चार किलोमीटर की खडी चढाई, और लीजिए द्रोणागिरी गांव में आपका स्‍वागत है। पर्वत देवता के पुजारी और इसी गांव के रहने वाले दीवान सिंह रावत बताते हैं कि कभी गांव में 125 परिवार थे, लेकिन अब 55 से 60 ही रह गए हैं। हालांकि जो लोग दूसरे शहरों में  हैं, उनका भी गांव आना-जाना लगा रहता है।

आखिर यह गांव हनुमान से क्‍यों नाराज है ? यह पूछने पर पुजारी दीवान सिंह के पुत्र उदय सिं रावत बताते हैं कि रामायण काल में लंका पर चढाई के वक्‍त युद्ध में  मेघनाद के शक्ति प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। ऐसे में सुषेण वैद्य ने कहा कि लक्ष्मण का जीवन बचाने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत पडेंगी। इसी बूटी को लेने हनुमान द्रोणागिरी पर्वत पहुंचे। गांव के लोग इसलिए नाराज हैं कि  हनुमान संजीवनी के बजाय द्रोणागिरी पर्वत का एक हिस्सा उखाड़कर ही लंका ले गए, जबकि, ये पर्वत उनके ईष्ट देव हैं।

लोगों का कहना है कि हनुमान जब संजीवनी लेने आए, तब गांव की एक वृद्धा ने उन्हें पर्वत का वह हिस्सा दिखाया था, जहां संजीवनी बूटी उगती थी। यह भी बताया कि बूटी तक कैसे पहुंच सकते हैं। बावजूद इसके वह पर्वत का एक हिस्‍सा ले गए।  हालांकि इन लोगों की राम से कोई नाराजगी नहीं है और वे श्रद्धा से राम की भक्ति करते हैं। रामलीला का आयोजन यहां सिर्फ तीन दिन होता है। श्रीराम जन्म व सीता स्वयंवर के बाद सीधे राम का राज्याभिषेक कर दिया जाता है। इसमें हनुमान लीला का मंचन नहीं किया जाता। लोगों की धारणा है कि गांव में संपूर्ण रामलीला का मंचन करने से कुछ-न-कुछ अशुभ अवश्य होता है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद श्रीराम स्वयं पर्वत देवता को मनाने के लिए द्रोणागिरी गांव आए थे। गांव में एक छोटे से पहाड़ पर जहां उनके चरण पड़े, उसे ‘रामपातल’ नाम से राम तीर्थ के रूप में पूजा जाता है। इस जंगल में भोजपत्र समेत दुर्लभ जड़ी-बूटी पाई जाती हैं। गांव के आसपास जड़ी-बूटियों का भंडार है।

माना जाता है कि श्रीलंका के दक्षिणी तट गाले में मौजूद ‘श्रीपद’ नाम की जगह पर स्थित पहाड़ ही द्रोणागिरी पर्वत का वह हिस्सा है, जिसे संजीवनी की खातिर हनुमान हिमालय से उठाकर ले गए थे। इस पहाड़ को ‘एडम्स पीक’ भी कहते हैं, जबकि श्रीलंकाई लोग इसे ‘रहुमशाला कांडा’ कहते हैं। यह पहाड़ रतनपुर जिले में स्थित है।

 

You Might Also Like

सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को मिलेगी नई पहचान: मुख्यमंत्री धामी

बिना अनुमति संचालित मस्जिद-मदरसा भवन पर एमडीडीए की कार्रवाई, भवन किया सील

Himalaya की वादियों में नीति घाटी में 933 धावकों ने लिखी नई कहानी

तीन घन्टे तक रुकी रही केदारनाथ यात्रा 

एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा प्रहार, 50 बीघा से अधिक क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त

TAGGED: a remote village in Uttarakhand, Discover the unique story of Dronagiri, where locals still express anger towards Lord Hanuman for taking a part of their sacred mountain during the Ramayana era.
Web Editor August 1, 2025
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article Dehradun vehicle theft : जेल से छूटने के 24 घंटेे बाद ही फिर पहुंचा सलाखों के पीछे
Next Article Dronagiri village Hanuman story : A Village is Still Upset with Lord Hanuman.
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

रंगों की चादर ओढ़कर सैलानियों के स्वागत को तैयार फूलों की घाटी
करियर June 1, 2026
सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को मिलेगी नई पहचान: मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड June 1, 2026
बिना अनुमति संचालित मस्जिद-मदरसा भवन पर एमडीडीए की कार्रवाई, भवन किया सील
उत्तराखंड June 1, 2026
Himalaya की वादियों में नीति घाटी में 933 धावकों ने लिखी नई कहानी
उत्तराखंड May 31, 2026

Recent Posts

  • रंगों की चादर ओढ़कर सैलानियों के स्वागत को तैयार फूलों की घाटी
  • सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को मिलेगी नई पहचान: मुख्यमंत्री धामी
  • बिना अनुमति संचालित मस्जिद-मदरसा भवन पर एमडीडीए की कार्रवाई, भवन किया सील
  • Himalaya की वादियों में नीति घाटी में 933 धावकों ने लिखी नई कहानी
  • तीन घन्टे तक रुकी रही केदारनाथ यात्रा 

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,224)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (6,086)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,587)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,487)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,353)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?