By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: उत्तराखंड में इस साल होगी गुलदार की वैज्ञानिक गणना
Share
Notification Show More
Latest News
मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
उत्तराखंड
चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
उत्तराखंड
Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
उत्तराखंड
टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी
उत्तराखंड
एसजीआरआरयू जॉब उत्सव 4.0: 200 युवाओं को मिला प्लेसमेंट, 35 कंपनियों ने खोले करियर के द्वार
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में इस साल होगी गुलदार की वैज्ञानिक गणना
उत्तराखंड

उत्तराखंड में इस साल होगी गुलदार की वैज्ञानिक गणना

Web Editor
Last updated: 2026/01/09 at 5:43 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Uttarakhand to Conduct Scientific Leopard Census to Tackle Human-Wildlife Conflict

देहरादून, 9 जनवरी 2025 : उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव–वन्यजीव संघर्ष के बीच इस वर्ष गुलदार (तेंदुआ) की वैज्ञानिक गणना कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान को अध्ययन प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह सर्वे केवल संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुलदार के बदलते व्यवहार, गतिविधियों और मानव बस्तियों की ओर बढ़ते रुझान का भी गहन विश्लेषण किया जाएगा।
वन विभाग के मुताबिक पिछली गणना में राज्य में गुलदारों की अनुमानित संख्या करीब तीन हजार आंकी गई थी। लगभग हर जिले में इनकी सैकड़ों की मौजूदगी दर्ज की गई, जिससे ग्रामीण ही नहीं, शहरी इलाकों में भी दहशत का माहौल बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का विखंडन, शिकार प्रजातियों की कमी, आबादी का विस्तार और मानवीय गतिविधियों में बढ़ोतरी ने गुलदार के स्वभाव और व्यवहार में बड़ा बदलाव किया है।
आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक गुलदार के हमलों में 550 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दो हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बीते वर्ष ही 16 लोगों की मौत गुलदार के हमलों में हुई। विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में गुलदार दिन के समय आबादी वाले क्षेत्रों में नजर आने लगे हैं, जो पहले बहुत कम देखने को मिलता था।
प्रस्तावित गणना और व्यवहार अध्ययन से गुलदार के मूवमेंट पैटर्न, शिकार प्रवृत्ति, कॉरिडोर और मानव बस्तियों से टकराव के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। इससे ऐसी ठोस नीति तैयार की जा सकेगी, जिसमें वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

 

 

आबादी वाले इलाकों में बढ़ती गुलदार की मौजूदगी

प्रदेश में 1700 से अधिक गांवों के खाली होने और खेती-बाड़ी को हो रहे नुकसान के बीच वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बन चुका है। देहरादून, हरिद्वार सहित मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार की मौजूदगी अब सामान्य होती जा रही है। इसी को देखते हुए सरकार अब केवल रेस्क्यू या पिंजरे लगाने तक सीमित न रहकर, व्यवहार अध्ययन, कॉरिडोर मैपिंग और जन-जागरूकता जैसे दीर्घकालिक उपायों पर जोर दे रही है।

You Might Also Like

मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर

चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच

Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 

टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी

एसजीआरआरयू जॉब उत्सव 4.0: 200 युवाओं को मिला प्लेसमेंट, 35 कंपनियों ने खोले करियर के द्वार

TAGGED: Uttarakhand will conduct a scientific leopard census in 2026 with the help of the Wildlife Institute of India to study leopard population and behavior amid rising human-wildlife conflict.
Web Editor January 9, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article पर्यावरण के साथ रोज़गार की बहार 
Next Article मौसम पूर्वानुमान को मिलेगी नई सटीकता
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
उत्तराखंड April 15, 2026
चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
उत्तराखंड April 15, 2026
Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
उत्तराखंड April 15, 2026
टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी
उत्तराखंड April 15, 2026

Recent Posts

  • मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
  • चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
  • Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
  • टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी
  • एसजीआरआरयू जॉब उत्सव 4.0: 200 युवाओं को मिला प्लेसमेंट, 35 कंपनियों ने खोले करियर के द्वार

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,109)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (5,996)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,501)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,376)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,285)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?