Uttarakhand to Conduct Scientific Leopard Census to Tackle Human-Wildlife Conflict
देहरादून, 9 जनवरी 2025 : उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव–वन्यजीव संघर्ष के बीच इस वर्ष गुलदार (तेंदुआ) की वैज्ञानिक गणना कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान को अध्ययन प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह सर्वे केवल संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुलदार के बदलते व्यवहार, गतिविधियों और मानव बस्तियों की ओर बढ़ते रुझान का भी गहन विश्लेषण किया जाएगा।
वन विभाग के मुताबिक पिछली गणना में राज्य में गुलदारों की अनुमानित संख्या करीब तीन हजार आंकी गई थी। लगभग हर जिले में इनकी सैकड़ों की मौजूदगी दर्ज की गई, जिससे ग्रामीण ही नहीं, शहरी इलाकों में भी दहशत का माहौल बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का विखंडन, शिकार प्रजातियों की कमी, आबादी का विस्तार और मानवीय गतिविधियों में बढ़ोतरी ने गुलदार के स्वभाव और व्यवहार में बड़ा बदलाव किया है।
आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक गुलदार के हमलों में 550 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दो हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बीते वर्ष ही 16 लोगों की मौत गुलदार के हमलों में हुई। विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में गुलदार दिन के समय आबादी वाले क्षेत्रों में नजर आने लगे हैं, जो पहले बहुत कम देखने को मिलता था।
प्रस्तावित गणना और व्यवहार अध्ययन से गुलदार के मूवमेंट पैटर्न, शिकार प्रवृत्ति, कॉरिडोर और मानव बस्तियों से टकराव के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। इससे ऐसी ठोस नीति तैयार की जा सकेगी, जिसमें वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
आबादी वाले इलाकों में बढ़ती गुलदार की मौजूदगी
प्रदेश में 1700 से अधिक गांवों के खाली होने और खेती-बाड़ी को हो रहे नुकसान के बीच वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बन चुका है। देहरादून, हरिद्वार सहित मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार की मौजूदगी अब सामान्य होती जा रही है। इसी को देखते हुए सरकार अब केवल रेस्क्यू या पिंजरे लगाने तक सीमित न रहकर, व्यवहार अध्ययन, कॉरिडोर मैपिंग और जन-जागरूकता जैसे दीर्घकालिक उपायों पर जोर दे रही है।
