Urban Challenge Fund Boosts Infrastructure Development in Uttarakhand Cities
अर्बन चैलेंज फंड से शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार
देहरादून, 16 February 2026 । उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों की तस्वीर आने वाले वर्षों में तेजी से बदलने वाली है। सड़क, पेयजल, सीवरेज, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार ने अहम पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अर्बन चैलेंज फंड को मंजूरी मिलने से प्रदेश के शहरों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस कोष के माध्यम से शहरी विकास परियोजनाओं को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहना होगा। योजना के अनुसार किसी भी परियोजना की कम से कम 50 प्रतिशत राशि बाजार से—जैसे बैंक ऋण, म्युनिसिपल बांड या सार्वजनिक-निजी भागीदारी—जुटाई जाएगी। इसके बदले केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत योगदान देगी। केंद्र की ओर से कुल एक लाख करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है, जिससे अगले पांच वर्षों में देशभर के शहरी क्षेत्रों में लगभग चार लाख करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता खुलेगा।
उत्तराखंड में देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रुद्रपुर और काशीपुर जैसे प्रमुख शहरों में जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, ठोस कचरा प्रबंधन, शहरी परिवहन और हरित क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी। वहीं पर्यटन आधारित शहरों—नैनीताल और मसूरी—में विरासत क्षेत्रों के संरक्षण, भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
छोटे पर्वतीय शहरों को भी संबल
पर्वतीय राज्यों और एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 5,000 करोड़ रुपये की ऋण चुकौती गारंटी योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत छोटे नगर पहली बार बाजार से कर्ज ले सकेंगे, जिसकी गारंटी केंद्र सरकार देगी। इससे अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी और कोटद्वार जैसे शहरों में 20 से 28 करोड़ रुपये तक की विकास योजनाएं साकार हो सकेंगी।
इन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत शहरों को विकास केंद्र के रूप में तैयार करना, पुराने शहरी इलाकों का पुनर्विकास, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट, जल व स्वच्छता परियोजनाएं, हरित एवं जलवायु-अनुकूल ढांचा तथा आपदा जोखिम को कम करने वाले कार्य प्राथमिकता में रहेंगे। इससे उत्तराखंड के शहरी विकास को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद है।


