Dehradun Not Unsafe: Women’s Commission & Police Refute Private Survey
देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित बताने वाली रिपोर्ट पर सवाल
देहरादून, 03 सितंबर 2025 : देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल करने वाली निजी कंपनी पी वैल्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट पर राज्य महिला आयोग और पुलिस प्रशासन ने सवाल उठाए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही किसी सरकारी एजेंसी द्वारा कराया गया है। रिपोर्ट महज़ 12,770 महिलाओं के टेलीफोनिक इंटरव्यू पर आधारित है, जिसमें देहरादून से केवल 400 महिलाओं की राय ली गई, जबकि यहां महिला आबादी लगभग 9 लाख है।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि केवल 4% महिलाएं सुरक्षा संबंधी एप का इस्तेमाल करती हैं, जबकि हकीकत यह है कि गौरा शक्ति एप में ही 1.25 लाख महिलाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 16,649 देहरादून की हैं। अगस्त 2025 में डायल 112 पर आई 12,354 शिकायतों में से सिर्फ 2,287 महिलाओं से जुड़ी थीं और इनमें से 1,664 घरेलू विवाद से संबंधित थीं। छेड़छाड़ और यौन अपराधों की शिकायतों की संख्या मात्र 11 रही, यानी कुल महिला शिकायतों का औसत 1% से भी कम। पुलिस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 13 मिनट रहा।
महिला सुरक्षा के लिए देहरादून में वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प डेस्क, SOS बटन, गौरा चीता पेट्रोलिंग यूनिट, पिंक बूथ और एकीकृत सीसीटीवी नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं संचालित हैं। वर्तमान में शहर में 14 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं।
पुलिस के अनुसार सर्वे में दिखाए गए आंकड़े वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में पुलिस पेट्रोलिंग के मामले में देहरादून का स्कोर 33% है, जबकि सबसे सुरक्षित बताए गए कोहिमा का स्कोर केवल 11% है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के मामले में देहरादून का स्कोर राष्ट्रीय औसत से बेहतर (6% बनाम 7%) है।
प्रशासन का मानना है कि सर्वे की पद्धति न तो वैज्ञानिक है और न ही तथ्यात्मक, क्योंकि प्रतिभागियों की आयु, पृष्ठभूमि और स्थानीयता जैसी बातों को ध्यान में नहीं रखा गया। देहरादून का एनसीआरबी डेटा भी बताता है कि यहां अपराध दर मेट्रो शहरों की तुलना में काफी कम है। यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और पर्यटक सुरक्षित माहौल में रहते और पढ़ाई करते हैं।
