Delhi’s Air Pollution Hides Pathogenic Bacteria: A New Study Reveals
नई दिल्ली, 3 सितंबर 2025 : क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की हवा में केवल धूल और धुआँ ही नहीं, बल्कि संक्रमण फैलाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया भी तैर रहे हैं? और वो भी इतनी मात्रा में कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में इनकी संख्या कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों से दोगुनी से ज़्यादा है!
जी हाँ, बोस संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला अध्ययन किया है, जिसमें दिल्ली की हवा में छिपे ऐसे रोगजनक बैक्टीरिया का खुलासा हुआ है जो फेफड़ों, आंतों, मुँह और त्वचा तक में संक्रमण फैला सकते हैं। इस “अदृश्य खतरे” को समझना अब उतना ही ज़रूरी हो गया है, जितना ट्रैफिक से बचना।
दिल्ली जैसे महानगरों में PM2.5 (सूक्ष्म धूलकण) की मौजूदगी इन बैक्टीरिया के लिए सुपरहाईवे की तरह काम करती है। ये इतने छोटे होते हैं कि आसानी से फेफड़ों की गहराई तक पहुँच जाते हैं और वहाँ बैक्टीरिया को चुपचाप ले जाकर संक्रमण का खेल शुरू कर देते हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये बैक्टीरिया सर्दियों में और ज़्यादा एक्टिव हो जाते हैं! क्यों? क्योंकि सर्द मौसम में हवा ठंडी, स्थिर और नम हो जाती है — यानी एकदम परफेक्ट माहौल इन सूक्ष्मजीवों के “हवा में तैरते रहने” के लिए।
डॉ. सनत कुमार दास के नेतृत्व में हुए इस शोध में साफ कहा गया है कि जब मौसम बदलता है — जैसे सर्दियों से गर्मियों की ओर जाने वाले वो धुंधले दिन या बारिश वाले दिन — उस समय ये बैक्टीरिया और भी अधिक सक्रिय हो जाते हैं। मतलब, अगर आप ठंड के मौसम में दिल्ली की गलियों में खुलकर साँस ले रहे हैं, तो ज़रा सावधान हो जाइए!
यह शोध ‘Atmospheric Environment: X’ नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है और यह न केवल वैज्ञानिकों के लिए बल्कि शहरी नियोजन करने वालों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के लिए भी एक अलार्म बेल है।
तो अगली बार जब आप कहें कि “दिल्ली की हवा में दम है” — तो थोड़ा रुकिए… और सोचिए, कहीं ये ‘दम’ आपको बीमार तो नहीं कर रहा?
