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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > टूटी सडक :  चूल्‍हे की चिंता में दहशत का सफर
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टूटी सडक :  चूल्‍हे की चिंता में दहशत का सफर

Web Editor
Last updated: 2025/09/07 at 4:28 AM
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3 Min Read
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Cloudburst in Tharali: Roads Blocked, Ration and LPG Crisis Deepens

आपदाग्रस्‍त थराली के आधा दर्जन गांवों की पीडा

थराली, 7 सितंबर 2025 : खूबसूरत दिखने वाले पहाडों की अपनी विद्रूपता भी है। इसे वही देख सकता है, जिसे यहां रहकर पहाड सी चुनौतियों का सामान करना पडता है। पिछले दिनों थराली में बादल फटा तो मानो आसमान ही टूट पडा। सडकें यहां की जीवन रेखा मानी जाती हैं, जब जीवन रेखा ही कट जाए तो क्‍या होगा। पखवाडे भर से सडक मलबे से पटी हुई है। ऐसे में राशन का क्‍या होगा। जाहिर है संकट चूल्‍हों तक जा पहुंचा है। क्षेत्र के कम से कम आधा दर्जन से ज्‍यादा गांवों की यही कहानी है।

दरअसल,  नंद केसरी -जोला -सेरा मोटर मार्ग कुदरत की मार से जख्‍मी है। इस पर पैदल सफर भी जान हथेली पर रखकर ही किया जा रहा है। ऐसे में सेरा, जोला चीडिंगा, आँखोड़  और सारी जैसे कई गांवों के लिए मुश्किल खडी हो गई है। वाहनों की आवाजाही बंद होने से रसोई गैस सिलिंडर पहुंच नहीं पा रहा। चल्‍हे की लौ जलती रहे इसके लिए लोग खतरा उठाकर पांच किलोमीटर दूर देवाल तक कंधे पर सिलिंडर ढो रहे हैं। बारिश से खतरनाक हो चुकी सडक पर दरकते पहाड की दहशत के साथ पेडों की टहनियों को पकड यह सफर पूरा हो रहा है।

मुसीबत इतने पर ही नहीं टल रही। ज्‍यादातर ग्रामीण राशन के लिए सस्‍ते गल्‍ले की दुकानों पर निर्भर हैं। जब सडक बंद है तो राशन की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही। चिडिगा के प्रधान राकेश चंद्र कहते हैं कि गांव के लोगों को नमक, तेल, मसाले, चीनी और चायपत्ती तक के लिए भटकना पड रहा है। वह कहते हैं कि ‘कई बार विभाग को लिखित और मौखिक सूचना दे चुके, लेकिन अभी तक सडक नहीं खुल पाई है।’ जोला के प्रधान प्रकाश चंद्र तो एक कदम आगे बढकर चेतावनी देते हैं कि ‘ अगर मोटर मार्ग समय पर नहीं खुला तो नौबत भुखमरी तक पहुंच सकती है। ‘ ग्रामीण राजेंद्र गडिया और मोहन चंद्र की भी यही पीडा है।

विषम भूगोल में कुदरत के काेेप का शिकार हुए थराली में प्रशासन की भी अपनी चुनौतियां हैं। आपदा का दायरा करीब 15 किमी के दायरे में फैला है। ऐसे में जिंदगी को पटरी पर लाने की तमाम कोशिशें भी नाकाफी साबित हो रही है। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता जगदीश टम्टा की बातों में इन चुनौतियों की झलक मिल जाती है। वह कहते हैं ‘ थराली में स्थित अभी सुधर नहीं पाई है। जिस कारण ग्रामीण सड़कों को खोलने में समय लगेगा।’

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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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