AI-Based Intrusion Detection System to Protect Elephants on Uttarakhand Railway Tracks
रामनगर, 07 February 2026। उत्तराखंड के तराई अंचल में रेल पटरियों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने तकनीक आधारित समाधान अपनाया है। इसके तहत पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत संवेदनशील रेल खंडों पर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाया जा रहा है। 99.18 रूट किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में यह पहल वन्यजीव संरक्षण के साथ रेल परिचालन की सुरक्षा को भी नई दिशा देगी।
इस आधुनिक प्रणाली की खासियत यह है कि यह डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (डीएएस) तकनीक पर काम करती है। ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से ट्रैक पर होने वाले सूक्ष्म कंपन और हाथियों की चाल से जुड़े पूर्व-रिकॉर्डेड पैटर्न को यह तुरंत पहचान लेती है। जैसे ही हाथी या उनका झुंड रेल लाइन के नजदीक पहुंचता है, सिस्टम लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को त्वरित अलर्ट भेज देता है। इससे समय रहते ट्रेन की गति नियंत्रित की जा सकती है या आवश्यक होने पर ट्रेन रोकी जा सकती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
रेलवे प्रशासन इस तकनीकी पहल को समग्र रणनीति के रूप में लागू कर रहा है। वन विभाग के साथ समन्वय कर ट्रेनों की गति सीमा निर्धारण, चेतावनी संकेतक, अंडरपास निर्माण, बाड़बंदी, हनी बी बजर डिवाइस और थर्मल कैमरों जैसे उपाय भी साथ-साथ किए जा रहे हैं। एलिफेंट कॉरिडोर के विकास से हाथियों की प्राकृतिक आवाजाही सुरक्षित बनी रहे, इस दिशा में भी प्रयास तेज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल देश के अन्य वन्यजीव-संवेदनशील रेल खंडों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
पहले चरण में चयनित खंड
पहले चरण में 24 रूट किलोमीटर पर सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। इसमें लालकुआं–गुलरभोज (15.8 किमी), छतरपुर–हल्दी रोड (1.2 किमी), हल्दी रोड–लालकुआं (2.7 किमी), पंतनगर–लालकुआं (1.2 किमी) और लालकुआं–हल्द्वानी (3.2 किमी) शामिल हैं। इसके अलावा काशीपुर–रामनगर और खटीमा–बनबसा खंडों पर भी कार्य प्रगति पर है—ये सभी प्रमुख हाथी गलियारों से जुड़े क्षेत्र हैं।


