Uttarakhand Smart Panchayats: 4,500+ Villages Go Digital with AI Tool Sabhasaar
देहरादून, 08 feburary 2026। उत्तराखंड में ग्राम स्वराज की परिकल्पना अब तकनीक के ठोस आधार पर आगे बढ़ रही है। प्रदेश की 5329 ग्राम पंचायतें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘सभासार’ टूल के जरिए अपनी बैठकों और निर्णय प्रक्रिया को डिजिटल रूप दे रही हैं। इससे न केवल पंचायतों की कार्यकुशलता बढ़ी है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में कागजी दस्तावेजों का रखरखाव हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में सभासार एआई टूल ने पंचायत प्रतिनिधियों को इस झंझट से काफी हद तक मुक्ति दिलाई है। ग्राम सभा की बैठकों में हुई चर्चाएं, प्रस्ताव और संकल्प अब स्वतः रिकॉर्ड होकर सुरक्षित डिजिटल रूप में संरक्षित हो रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी तेजी आई है।
प्रदेश में ग्राम पंचायतों द्वारा सभासार का सक्रिय उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल संचालन से बैठकों की नियमितता बढ़ी है और नागरिक सहभागिता का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो पा रहा है। विकास कार्यों से जुड़े फैसलों की निगरानी अब आसान हो गई है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। कार्य-बिंदुओं की ट्रैकिंग से यह भी स्पष्ट हो पा रहा है कि कौन-सा संकल्प कब और किस स्तर पर पूरा हुआ।
इस संबंध में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सभासार जैसे एआई टूल ग्राम पंचायतों को तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे ग्राम सभाओं की कार्यवाही का सटीक दस्तावेजीकरण संभव हो रहा है और ग्रामीण शासन व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा सुरक्षा के लिहाज से यह प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है।
सभासार एआई टूल पंचायती राज मंत्रालय की पहल है, जिसे सरकारी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित किया जा रहा है। यह इंडियाएआई मिशन के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियमों का पालन करता है। देशभर में भी इसका दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जनवरी की शुरुआत तक 1.11 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें इस टूल का उपयोग कर चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में एआई आधारित यह मॉडल ‘स्मार्ट विलेज’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। डिजिटल पंचायतें न केवल प्रशासन को मजबूत करेंगी, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र को भी नई दिशा देंगी।


