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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > कार्बेट के जंगलों में फिर गूंजी इंसानी-सी चीख
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कार्बेट के जंगलों में फिर गूंजी इंसानी-सी चीख

Web Editor
Last updated: 2026/02/16 at 4:57 AM
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3 Min Read
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Rare Spot-Bellied Eagle Owl Spotted Near Corbett After Five Years

देहरादून,  16 February 2026 । कार्बेट नेशनल पार्क से सटे रामनगर के जंगलों में एक बार फिर रहस्यमयी, इंसानी चीख जैसी आवाज ने लोगों का ध्यान खींचा है। जांच में पता चला कि यह आवाज दुर्लभ स्पॉट-बेलीड ईगल आउल की है, जिसकी मौजूदगी सीतावनी और रिगोंड़ा क्षेत्रों में दर्ज की गई है। अपनी गूंजदार और डरावनी प्रतीत होने वाली आवाज के कारण यह उल्लू स्थानीय तौर पर “जंगल का भूत” भी कहा जाता है।
वन्यजीव जानकारों के मुताबिक यह प्रजाति इससे पहले वर्ष 2020 में कार्बेट के ढिकाला और सीतावनी पर्यटन जोन में देखी गई थी। करीब पांच साल बाद इसका दोबारा दिखना जंगल की सेहत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस बार रिगोंड़ा खत्ते के घने वन क्षेत्र में इसकी मौजूदगी को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने अपने कैमरे में कैद किया।
दीप रजवार बताते हैं कि ईगल आउल की आवाज इंसानों की चीख जैसी लगती है, जिससे रात के समय ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल बन जाता है। कई बार लोग इसे भूतिया गतिविधियों से जोड़ लेते हैं, जबकि यह उल्लू की स्वाभाविक पुकार होती है। इसी आवाज के जरिए वह अपने क्षेत्र की पहचान करता है और साथी पक्षियों से संवाद करता है।
रामनगर क्षेत्र के जंगलों में ब्राउन फिश आउल, टॉनी फिश आउल, ओरिएंटल स्कॉप्स आउल, एशियन बार्ड आउलेट, स्पॉटेड आउलेट और ब्राउन हॉक आउल जैसी प्रजातियां भी आम तौर पर देखी जाती हैं। उल्लू अपनी तीव्र श्रवण क्षमता और पैनी दृष्टि के सहारे रात में शिकार करता है—हल्की-सी आहट भी उसकी पकड़ से बाहर नहीं जाती।
विशेषज्ञ चेताते हैं कि बढ़ता ध्वनि प्रदूषण उल्लुओं के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। तेज आवाजें इनके शिकार और प्रजनन दोनों को प्रभावित कर रही हैं। पहले कोसी नदी के आसपास उल्लू आसानी से नजर आते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घट रही है। संरक्षणविदों का मानना है कि यदि जंगलों में शांति और प्राकृतिक वातावरण बनाए रखा गया, तो ऐसी दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण संभव है।

कार्बेट क्षेत्र में 18 से अधिक उल्लू प्रजातियां
कार्बेट और आसपास के वन क्षेत्रों में उल्लुओं की 18 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन स्पॉट-बेलीड ईगल आउल बहुत कम दिखाई देता है। आकार में बड़ा यह निशाचर पक्षी घने जंगलों में ऊंचे पेड़ों पर ठिकाना बनाता है। अंधेरे में इसकी चमकती आंखें और गूंजदार आवाज रात के सन्नाटे को भेद देती है।

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TAGGED: has been spotted again in forests near Corbett National Park after five years, known for its human-like scream, signaling a positive sign for forest ecology., The rare spot-bellied eagle owl
Web Editor February 16, 2026
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