By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: मानसून के पैटर्न में आए बदलाव से हैरत में वैज्ञानिक
Share
Notification Show More
Latest News
Kedanath dham : गरुड़ चट्टी मार्ग फिर तैयार, आम आवाजाही पर रहेगा रोक
उत्तराखंड
मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
उत्तराखंड
चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
उत्तराखंड
Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
उत्तराखंड
टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > मानसून के पैटर्न में आए बदलाव से हैरत में वैज्ञानिक
उत्तराखंड

मानसून के पैटर्न में आए बदलाव से हैरत में वैज्ञानिक

Web Editor
Last updated: 2025/09/18 at 12:48 PM
Web Editor
Share
5 Min Read
SHARE

Uttarakhand’s Changing Monsoon Pattern: 8 Cloudbursts, 27 Dead | Experts Raise Alarm

इस साल 20 जून से 18 सितंबर तक बादल फटने की आठ बडी घटनाएं दर्ज

Contents
Uttarakhand’s Changing Monsoon Pattern: 8 Cloudbursts, 27 Dead | Experts Raise Alarmक्‍यों फटते हैं बादल20 जून से 18 सितंबर तक बादल फटने की प्रमुख घटनाएं

देहरादून, 18 सितंबर 2025  : इस बार मानसून के पैटर्न में आए बदलाव से वैज्ञानिक हैरत में हैं।  उत्‍तराखंड में मानसून ने 20 जून को प्रवेश किया था और तब से अब तक बादल फटने की करीब आठ बडी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें 27 से ज्‍यादा लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि 100 से अधिक लापता हैं। बारिश और भूस्‍खलन के चलते प्रदेश को हजारों करोड रुपये का नुकसान हो चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार मानसून की ‘चाल’ में आए बदलाव के चलते इस तरह की घटनाएं अधिक हो रही हैं। मानसून के पैटर्न में आए बदलाव का परिणाम ही है कि इस सीजन में अरुणाचल प्रदेश मे बारिश में 37% , जबकि असम और मेघालय में  42%  की कमी दर्ज की गई।  इसके विपरीत इसी अवधि में उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 34% अधिक वर्षा हुई।

बादल फटने की घटनाओं को लेकर यदि इतिहास में झांकें तो कुछ रोचक तथ्‍य पता चलते हैं। जर्नल ऑफ जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण इस हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।  वर्ष 2010-2020 के बीच बादल फटने की 29 बडी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें जन-धन की भारी हानि हुई है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में पिछले 20 वर्षों  में बादल फटने की सबसे ज्यादा 50 घटनाएं 2021 में दर्ज की गईं। इस वर्ष मई में ही लगभग 24 मामलों की पुष्टि हुई। कुल मिलाकर, 2021 में 308 लोग मारे गए और 61 लापता  हुए।

एनएनबी गढवाल विश्‍वविद्वालय में भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो एमपीएस बिष्‍ट के अनुसार इस बार मानसून की ‘चाल’ में बडा बदलाव महसूस किया गया है। बंगाल की खाडी से उठने वाली हवाएं अब पश्चिमी हिमालय से टकरा रही हैं, जबकि पहले येे हवाएं हिमालय के पूर्वी भाग से टकराती थीं। नतीजतन, उत्‍तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर में भारी बारिश देखने को मिल रही है। इसके अलावा उच्‍च हिमालयी क्षेत्रों में बादल संकरी घाटियों में फंस जाते है, ऐसे में बादल फटने की घटनाएं भी बढ रही हैं। दरअसल, देखा जाए तो मौसम के पैटर्न में आ रहे बदलाव पर नए सिरे से शोध की आवश्‍यकता है। यदि यह पैटर्न आगे भी जारी रहता है तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

क्‍यों फटते हैं बादल

आसान भाषा में समझें तो  जब गर्म हवा भाप को लेकर तेजी से ऊपर जाती है तो इससे बड़े-बड़े बादल बन जाते हैं। इन विशाल बादलों में भारी मात्रा में पानी संग्रहित होता है। ऊपर उठती हुई हवा इस पानी को नीचे नहीं गिरने देती। जब बादल में पानी का वजन इतना ज्यादा हो जाता है कि ऊपर उठती हवा भी उसे रोक नहीं पाती, तो सारा पानी एक साथ, एक ही क्षेत्र में बरस जाता है। वैज्ञानिक तौर पर देखें तो जब एक सीमित दायरे में एक घंटे में 100 मिमी बारिश दर्ज की जाए तो इसे बादल फटना कहा जाता है।

——————————

20 जून से 18 सितंबर तक बादल फटने की प्रमुख घटनाएं

29 जून: उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे पर बादल फटने से हुए भूस्खलन  में दो श्रमिकों की मौत, सात लापता।
05 अगस्त : उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने से 63 लापता, दो शव मिले ।

06 अगस्त : पौडी जिले के थैलीसैंण क्षेत्र के बुरासी गांव में बादल फटने से दो महिलाओं की मौौत
23 अगस्त : चमोली जिले के थराली कस्बे में बादल फटने से दो व्यक्ति की मौत और एक लापता।

30 अगस्त : बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के पौसारी गाँव में बादल फटने से दो की मौत, तीन लापता।

16 सितंबर : देहरादून  जिले में बादल फटने से भारी तबाही 15 की मौत, 16 लापता।

16 सितंबर: पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले में बादल फटने से भारी नुकसान, दोनों जिलों में एक-एक मौत

18 सितंबर : चमोली जिले के नंदानगर घाट में बादल फटने से 10 लापता।

 

 

 

 

You Might Also Like

Kedanath dham : गरुड़ चट्टी मार्ग फिर तैयार, आम आवाजाही पर रहेगा रोक

मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर

चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच

Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 

टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी

TAGGED: and massive damage, Experts are baffled by a significant change in the monsoon pattern, leading to a surge in cloudbursts in Uttarakhand. The state has seen 8 major cloudbursts, over 27 deaths, while rainfall in Northeast India remains low.
Web Editor September 18, 2025
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article हाकी से युवकों की पिटाई का वीडियो वायरल, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार 
Next Article सीएम ने किया मसूरी रोड और किमाडी क्षेत्र का निरीक्षण
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

Kedanath dham : गरुड़ चट्टी मार्ग फिर तैयार, आम आवाजाही पर रहेगा रोक
उत्तराखंड April 17, 2026
मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
उत्तराखंड April 15, 2026
चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
उत्तराखंड April 15, 2026
Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
उत्तराखंड April 15, 2026

Recent Posts

  • Kedanath dham : गरुड़ चट्टी मार्ग फिर तैयार, आम आवाजाही पर रहेगा रोक
  • मानव भारती स्कूल के छात्रों ने CBSE में रचा कीर्तिमान, कृष्णा जोशी टॉपर
  • चारधाम यात्रा में ‘सचेत ऐप’ बना सुरक्षा का डिजिटल कवच
  • Doon-Delhi express way : उत्तराखंड के विकास का नया कॉरिडोर 
  • टनल युग की ओर उत्तराखंड: गडकरी

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,111)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (5,996)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,503)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,377)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,286)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?