DEHRADUN, 08 September 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन भी जरूरी है। केवल किताबी ज्ञान से विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। परिवार और विद्यालय मिलकर बच्चों में जीवन-मूल्यों, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास की भावना विकसित करें, तभी मजबूत और जिम्मेदार पीढ़ी तैयार होगी।
मुख्यमंत्री मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ विकसित करना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पर्याप्त समय देने और उनकी रुचि व क्षमता को समझते हुए मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक और आर्यन देव उनियाल मौजूद रहे।
बाक्स : भविष्य निर्माता है शिक्षक
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने वाला मार्गदर्शक होता है। एक शिक्षक विद्यार्थी के साथ-साथ राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें उचित दिशा देने और विद्यार्थियों से मेहनत, अनुशासन व दृढ़ संकल्प के साथ लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया।
बाक्स : शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार : निशंक
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता को स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाजसेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कारों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाजहित में किए जा रहे कार्य उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।
डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करने की अपील की। उन्होंने फाउंडेशन और एसोसिएशन के शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास व सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।




