Uttarakhand Forest Fire Preparedness: CM Orders Full Readiness Before Fire Season
देहरादून, 31 जनवरी 2026। आगामी फायर सीजन को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वनाग्नि से निपटने के लिए सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन, तकनीकी उपकरण और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 15 फरवरी से फायर सीजन की शुरुआत हो जाती है।
शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के तहत चल रहे रिवर प्रोटेक्शन कार्यों और डीसिल्टिंग की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान संभावित बाढ़ को ध्यान में रखते हुए सभी कार्य तय समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। बैठक में बताया गया कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल संरक्षण, संवर्द्धन और संभरण योजनाओं के अंतर्गत प्रदेशभर में चेक डैम, रिचार्ज शाफ्ट और तालाबों का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बाक्स | समय रहते करें फायर लाइनों की सफाई
वनाग्नि की रोकथाम पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन पंचायतों और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के साथ नियमित समन्वय बनाया जाए। फायर लाइनों की समय रहते सफाई सुनिश्चित हो, वनभूमि पर अतिक्रमण को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए और वन संरक्षण में सराहनीय कार्य करने वाले कार्मिकों व स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और पूर्व तैयारी ही वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है।
बाक्स | प्रदेश में अब तक 708 चेक डैम तैयार
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 708 चेक डैम बनाए जा चुके हैं। वहीं ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों में 419 रिचार्ज शाफ्ट स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 108.94 करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण संभव होगा। इसके अलावा नौ वन प्रभागों में पेयजल विभाग और सारा के माध्यम से 14 जल स्रोतों के उपचार का कार्य चल रहा है। कैम्पा योजना के तहत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जलधाराओं का उपचार किया जा रहा है।
