Centre Extends Financial Support for Landslide Mitigation in Uttarakhand
देहरादून, 09 February 2026। उत्तराखंड के लिए राहत की खबर है। लंबे समय से राज्य में विकास, यातायात और जनजीवन के लिए गंभीर चुनौती बने भूस्खलन जोनों के वैज्ञानिक उपचार की दिशा में अब ठोस पहल होने जा रही है। केंद्र सरकार की सहायता से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में योजनाबद्ध और स्थायी समाधान लागू किए जाएंगे, जिससे आपदा जोखिम में कमी आने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने भूस्खलन जोखिम शमन योजना के तहत उत्तराखंड को लगभग 11 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह योजना वर्ष 2019 में उत्तराखंड के साथ-साथ सिक्किम, मिजोरम और नागालैंड जैसे संवेदनशील राज्यों के लिए स्वीकृत की गई थी। इसका उद्देश्य भूस्खलन संभावित राज्यों को आपदा से पहले तैयार करना और उनकी तकनीकी व संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना है, ताकि वे भविष्य में अपने स्तर पर भी शमन परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अनुसार, इस योजना को राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की आपदा जोखिम शासन प्रणाली में सुधार के तहत लागू किया गया। योजना के लिए कुल 43.91 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें उत्तराखंड के हिस्से में 10.92 करोड़ रुपये आए हैं। इस धनराशि का उपयोग भूस्खलन रोकथाम से जुड़े संरचनात्मक उपायों, ढलानों के उपचार, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना, जन-जागरूकता कार्यक्रमों और अधिकारियों व तकनीकी कर्मियों के प्रशिक्षण पर किया जाएगा।
इस योजना से पर्वतीय जिलों में सड़कों, आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते किए गए उपचार कार्यों से मानसून के दौरान होने वाले भूस्खलनों की तीव्रता और उनके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी भूस्खलन शमन को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम शमन परियोजना को भी मंजूरी दी है, जिसके लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा शमन कोष से वित्त पोषित होगी और इसमें उत्तराखंड सहित देश के 15 भूस्खलन संभावित राज्यों को शामिल किया गया है। इस पहल से बड़े स्तर पर भूस्खलन जोनों का वैज्ञानिक अध्ययन और दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित होने की उम्मीद है।




