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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में निजी संपत्ति नुकसान पर भी होगी वसूली
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उत्तराखंड में निजी संपत्ति नुकसान पर भी होगी वसूली

Web Editor
Last updated: 2026/03/26 at 2:58 AM
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3 Min Read
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Uttarakhand to Recover Damages from Protesters and Organisers

देहरादून, 26 March 2026: उत्तराखंड सरकार दंगों, बंद और आंदोलनों के दौरान होने वाले नुकसान पर अब कड़ा शिकंजा कसने जा रही है। राज्य कैबिनेट के फैसले के तहत ‘उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश 2024’ को विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश करने की तैयारी है। इस नए कानून के लागू होने के बाद न केवल सरकारी, बल्कि निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई भी जिम्मेदार लोगों से वसूली जाएगी।
सरकार के अनुसार अब तक लागू प्रावधानों में केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर कार्रवाई का प्रावधान था, लेकिन नए विधेयक में इसका दायरा बढ़ाकर आम लोगों की संपत्ति को भी शामिल किया गया है। यानी यदि किसी आंदोलन, हड़ताल या बंद के दौरान किसी की दुकान, घर या अन्य निजी संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई सीधे उपद्रवियों से कराई जाएगी।
इस प्रस्तावित कानून का सबसे सख्त और चर्चित पहलू यह है कि जिम्मेदारी केवल भीड़ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उस आंदोलन या बंद का आह्वान करने वाले आयोजकों और नेताओं को भी इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बेवजह हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लगेगा और कानून-व्यवस्था बेहतर होगी।
अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया। नए कानून के जरिए इस समस्या का समाधान करने की कोशिश की जा रही है।

पीड़ितों को मिलेगी त्वरित राहत
इस कानून के तहत एक विशेष दावा अभिकरण (ट्रिब्यूनल) गठित किया जाएगा, जहां पीड़ित व्यक्ति या सरकारी विभाग नुकसान की भरपाई के लिए दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। खास बात यह है कि इन मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत मिल सके।

कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शनों की प्रकृति को बदल सकता है। जहां एक ओर यह हिंसक गतिविधियों पर लगाम लगाएगा, वहीं दूसरी ओर आयोजकों की जिम्मेदारी तय होने से आंदोलनों की रणनीति भी अधिक जिम्मेदार और नियंत्रित हो सकती है।
सरकार का साफ संदेश है कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सुरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कीमत अब सीधे चुकानी होगी।

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TAGGED: holding organisers and leaders accountable., Uttarakhand government to introduce a bill to recover damages to public and private property during protests
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