SVAMITVA Scheme to Transform Uttarakhand Villages with Digital Property Records
देहरादून, 13 February 2026 I उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में भूमि और मकान के स्वामित्व को लेकर वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता अब इतिहास बनने की ओर है I स्वामित्व योजना राज्य के गांवों में पारदर्शिता और सुरक्षा की नई इबारत लिख रही है। इस योजना के तहत अब हर घर और हर संपत्ति सरकारी नक्शे में दर्ज होगी, जिससे ग्रामीण परिवारों को अपने स्वामित्व का पक्का और कानूनी प्रमाण मिलेगा।
राज्य में अब तक 7,441 गांवों का सर्वे पूरा किया जा चुका है और 2 लाख 78 हजार से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। कुल 16,826 गांवों वाले उत्तराखंड में यह आंकड़ा बताता है कि आधे से ज्यादा गांवों में डिजिटल संपत्ति रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। दुर्गम पहाड़ी भूगोल के बावजूद राज्य का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय माना जा रहा है।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, कॉर्स तकनीक और उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजरी का उपयोग किया जा रहा है। 1:500 पैमाने पर तैयार नक्शों में लगभग 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता होती है, जिससे जमीन और मकान की सीमाएं स्पष्ट रूप से तय हो जाती हैं। ड्रोन से ली गई तस्वीरों के आधार पर जियो-रेफरेंस्ड नक्शे बनाए जाते हैं, जिनका बाद में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मौजूदगी में भौतिक सत्यापन किया जाता है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम संपत्ति कार्ड जारी किए जाते हैं।
इस योजना से ग्रामीणों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। संपत्ति का वैध दस्तावेज मिलने से बैंक ऋण लेना आसान होगा, सरकारी योजनाओं तक सीधी पहुंच बनेगी और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना अधिक सटीक ढंग से हो सकेगी। सड़क, पानी, बिजली और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं की प्लानिंग भी बेहतर होगी।
राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने बताया कि देशभर में 1.86 लाख गांवों के लिए 3.06 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं और 31 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश इस योजना को लागू कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना उत्तराखंड के गांवों में विकास, भरोसे और आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रख रही है।




