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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > पर्यटन ग्राम गंगी में पंहुचते ही गूंगे हुए मोबाइल 
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पर्यटन ग्राम गंगी में पंहुचते ही गूंगे हुए मोबाइल 

Web Editor
Last updated: 2026/02/19 at 6:29 PM
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Gangi Village Faces No Mobile Network Despite Tourism Status in Uttarakhand

गंगी, 19 February 2026। टिहरी जिले का पर्यटन ग्राम गंगी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होने के बावजूद आज भी बुनियादी संचार सुविधाओं के लिए तरस रहा है। खतलिंग ग्लेशियर के बेस कैंप के रूप में प्रसिद्ध यह गांव अपनी मनमोहक वादियों और पंवालीकांठा की बर्फीली चोटियों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां पहुंचते ही मोबाइल फोन पूरी तरह खामोश हो जाते हैं।
गांव में करीब 130 परिवार निवास करते हैं। वर्ष 2017 में सड़क सुविधा पहुंची, जबकि बिजली की आपूर्ति भी हाल ही में 2025 में शुरू हो पाई। हालांकि संचार व्यवस्था अब भी अधूरी है। गांव में दो वर्ष पूर्व लगाया गया बीएसएनएल का मोबाइल टावर आज भी बिना सिग्नल के खड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि टावर तो स्थापित हो गया, लेकिन इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
स्थानीय निवासी गौर सिंह और मोहन लाल बताते हैं कि मोबाइल नेटवर्क के लिए ग्रामीणों को सात किलोमीटर दूर नलान से आगे जंगल क्षेत्र तक जाना पड़ता है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में संपर्क करना भी मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है।
मोबाइल नेटवर्क की कमी का असर विकास कार्यों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पंचायत स्तर पर प्रस्तावित निर्माण कार्य इसलिए रुके हुए हैं क्योंकि ब्लॉक प्रशासन द्वारा ऑनलाइन रिपोर्ट अनिवार्य की गई है, जो नेटवर्क के अभाव में संभव नहीं हो पा रही है।
पर्यटन ग्राम का दर्जा मिलने के बावजूद गंगी में मोबाइल नेटवर्क का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है। सड़क और बिजली के बाद अब ग्रामीणों को संचार सुविधा का इंतजार है, ताकि यह खूबसूरत गांव विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ सके।

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TAGGED: a designated tourist destination near Khatling Glacier, Gangi village in Uttarakhand, struggles with no mobile network as residents travel 7 km for signal despite road and electricity access.
Web Editor February 19, 2026
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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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