IIT Roorkee Develops Aerogel Thermal Wraps to Reduce Energy Consumption
देहरादून, 27 February 2026 । ऊर्जा खपत को कम करने और तापमान नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आईआईटी रुड़की ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने ‘एरोजेल थर्मल रैप्स’ नामक नई इंसुलेशन तकनीक विकसित की है, जिससे न केवल ऊर्जा की बचत होगी बल्कि उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ भी घटेगा। इस तकनीक को इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड को हस्तांतरित किया गया है, जिससे इसके व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ हो गया है।
इस परियोजना से जुड़े प्रो. कोशिक पाल और गुंजन शर्मा के अनुसार, यह तकनीक ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में कारगर साबित होगी। मशीनों और औद्योगिक उपकरणों में इसका उपयोग करने से उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा और संचालन लागत में कमी आएगी। साथ ही, ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह नवाचार अहम है। बिजली और ईंधन की खपत कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भवन निर्माण क्षेत्र में इसका व्यापक लाभ देखने को मिल सकता है। घरों और इमारतों में इस तकनीक के उपयोग से अंदर का तापमान लंबे समय तक संतुलित बना रहेगा। इससे गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट बनी रहेगी, जिससे एसी, कूलर और हीटर पर निर्भरता कम होगी और बिजली बिल में बचत होगी। खासतौर पर पहाड़ी और छोटे शहरों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी एरोजेल थर्मल रैप्स के उपयोग से इंजन की गर्मी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे ईंधन की खपत घटेगी और वाहनों का प्रदर्शन सुधरेगा।
क्या है एरोजेल थर्मल रैप्स तकनीक?
एरोजेल आधारित यह उन्नत इंसुलेशन तकनीक बेहद हल्के और छिद्रयुक्त पदार्थ पर आधारित है, जिसमें अधिकांश हिस्सा हवा का होता है। यह गर्मी के प्रवाह को रोकने में सक्षम है और इसे पाइप, मशीनों या सतहों पर लपेटकर तापमान नियंत्रित किया जाता है।


