3 New Fast Track Courts Approved in Uttarakhand to Speed Up Justice
देहरादून 26 March 2026 । उत्तराखंड में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य में तीन नए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (FTSC) स्थापित करने की मंजूरी दी है। ये नए न्यायालय देहरादून के विकासनगर, ऊधमसिंह नगर के काशीपुर और नैनीताल में स्थापित किए जाएंगे।
इस पहल के पीछे हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाया था। केंद्र सरकार ने लिखित उत्तर में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में पहले से ही चार फास्ट ट्रैक कोर्ट और चार फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय संचालित हैं, लेकिन बढ़ते मामलों के दबाव को देखते हुए अतिरिक्त अदालतों की आवश्यकता महसूस की गई।
विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों, तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि ने न्यायिक प्रणाली पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में नए न्यायालय इन संवेदनशील मामलों के तेजी से निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार, इन फास्ट ट्रैक अदालतों का मुख्य उद्देश्य गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों का समयबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर निपटारा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही केंद्र सरकार राज्यों और उच्च न्यायालयों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर न्यायिक प्रक्रिया की निगरानी भी कर रही है, ताकि लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके।
राज्य के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच पहले से ही एक चुनौती रही है। नए न्यायालय स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर ही मामलों की सुनवाई संभव हो सकेगी, जिससे पीड़ितों को बार-बार लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
सांसद रावत ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित होने के समान है”, ऐसे में फास्ट ट्रैक अदालतें आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होंगी।
क्यों जरूरी हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट
फास्ट ट्रैक न्यायालयों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों को तेजी से निपटाना है। खासकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई से न्याय व्यवस्था में विश्वास मजबूत होता है। उत्तराखंड में नए तीन न्यायालय शुरू होने से न केवल मामलों का तेजी से निस्तारण होगा, बल्कि न्याय प्रणाली और अधिक सुलभ और प्रभावी बन सकेगी।




