Dehradun Micro Earthquake Zonation Plan, Observatories in 8 Uttarakhand Cities
देहरादून, 27 March 2026। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखंड में अब राजधानी देहरादून के लिए माइक्रो भूकंप जोनिंग (सूक्ष्म भूकंप मूल्यांकन) की दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ने भूकंपीय निगरानी व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से देहरादून सहित आठ प्रमुख शहरों में आधुनिक भूकंप वेधशालाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। इस पहल का लक्ष्य वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर भूकंप जोखिम का सटीक आकलन कर प्रभावी आपदा प्रबंधन रणनीति तैयार करना है।
हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता वाले क्षेत्र में आता है, जहां बड़े भूकंप की संभावना बनी रहती है। ऐसे में तेजी से फैल रहे शहरी ढांचे वाले देहरादून के लिए माइक्रो जोनेशन अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत शहर को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर भू-संरचना, कंपन की तीव्रता और संभावित क्षति का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में निर्माण के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मानकों की आवश्यकता है।
इस परियोजना में देहरादून के अलावा हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, कोटद्वार, नैनीताल, गोपेश्वर और उत्तरकाशी को भी शामिल किया गया है। इन सभी शहरों में भूकंप वेधशालाओं की स्थापना के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
राज्य में पहले से मौजूद भूकंप चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने के लिए सेंसर नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में सक्रिय लगभग 169 सेंसरों की संख्या बढ़ाकर 500 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इन सेंसरों की मदद से जमीन के भीतर होने वाली सूक्ष्म हलचलों को भी रिकॉर्ड किया जा सकेगा, जिससे समय रहते चेतावनी जारी करना संभव होगा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि देहरादून का माइक्रो जोनेशन अध्ययन भविष्य की शहरी योजना और सुरक्षित निर्माण के लिए बेहद अहम साबित होगा। उनका कहना है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार डेटा से जोखिम को कम करने और नुकसान को सीमित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यह पहल राज्य के लिए अहम साबित हो सकती है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के साथ सुरक्षित और योजनाबद्ध विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का यह कदम उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और तकनीकी निगरानी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
: सायरन आधारित अलर्ट सिस्टम की तैयारी
राज्य सरकार करीब 500 भवनों में सायरन आधारित चेतावनी प्रणाली लगाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य भूकंप के दौरान लोगों को तत्काल सतर्क करना और संभावित नुकसान को कम करना है।




