Uttarakhand Weather Update: Automated Weather Stations Reach 31, Boost Disaster Warning System
देहरादून, 3 April 2026। उत्तराखंड में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (स्वचालित मौसम केंद्र) की संख्या बढ़ाकर अब 31 कर दी गई है। इससे मौसम की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुदृढ़ हुई है और बाढ़, भूस्खलन व अतिवृष्टि जैसी आपदाओं के प्रति समय रहते चेतावनी देना संभव हो सकेगा।
लोकसभा में त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि हिमालयी राज्यों में मल्टी हेजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इस प्रणाली के तहत आधुनिक प्रेक्षण नेटवर्क, उन्नत पूर्वानुमान मॉडल और जीआईएस आधारित निर्णय तंत्र का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मौसम संबंधी खतरों की समय रहते पहचान संभव हो रही है।
पिछले तीन वर्षों में उत्तराखंड की मौसम अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 31 स्वचालित मौसम केंद्रों के जरिए पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से सटीक डेटा एकत्र किया जा रहा है। इससे मौसम में होने वाले बदलावों का त्वरित विश्लेषण कर प्रशासन समय पर अलर्ट जारी कर पा रहा है।
बाढ़ पूर्वानुमान के लिए केंद्रीय जल आयोग द्वारा 24 घंटे पहले तक चेतावनी जारी की जा रही है। ‘फ्लड वाच इंडिया’ और ‘सी-फ्लड’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह जानकारी गांव स्तर तक पहुंच रही है। वहीं, दक्षिण एशिया फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम के जरिए 6 से 24 घंटे पहले अचानक बाढ़ की चेतावनी मिलना संभव हुआ है।
भूस्खलन के पूर्वानुमान हेतु Geological Survey of India द्वारा 48 घंटे पहले तक बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं। साथ ही Indian Space Research Organisation उपग्रह तकनीक के माध्यम से ग्लेशियरों की निगरानी कर रहा है, जिससे ग्लेशियल झील फटने जैसी घटनाओं के जोखिम का आकलन किया जा रहा है।
स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या में वृद्धि से राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र और अधिक सशक्त होगा, जिससे भविष्य में जनहानि और आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
बॉक्स: तीन स्थानों पर डॉप्लर रडार सक्रिय
लैंसडाउन में एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार स्थापित होने के बाद राज्य में अब कुल तीन डॉप्लर रडार कार्यरत हैं। इससे बादलों की गतिविधि, वर्षा की तीव्रता और तूफानों की सटीक निगरानी संभव हो रही है। केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी स्वचालित मौसम प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे दुर्गम इलाकों से भी सटीक मौसम जानकारी मिल रही है।
बॉक्स: जीवन रक्षक बन सकती है प्रणाली
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में मजबूत पूर्व चेतावनी तंत्र कई बार जीवन रक्षक साबित हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि इस प्रणाली का लाभ गांव स्तर तक पहुंचे, ताकि स्थानीय लोग समय रहते सतर्क हो सकें।




