By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: एक्सप्रेस-वे पर वन्यजीव गलियारे से हिचक रहे हाथी-गुलदार
Share
Notification Show More
Latest News
12वीं के छात्रों को ट्रैफिक नियम सिखाएगी देहरादून पुलिस, होगी विशेष कार्यशाला
उत्तराखंड
पक्षियों की रंग-बिरंगी दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटो प्रदर्शनी ने बढ़ाई प्रकृति संरक्षण की समझ
उत्तराखंड
अब जंगल के पड़ोस में जीना सीखेंगे लोग, वन्य जीवों से संघर्ष रोकने को बनेगी नई रणनीति
उत्तराखंड
उत्तराखंड में 2000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी
उत्तराखंड
सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता से मिलती है सफलता की राह : योगी आदित्यनाथ
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > एक्सप्रेस-वे पर वन्यजीव गलियारे से हिचक रहे हाथी-गुलदार
उत्तराखंड

एक्सप्रेस-वे पर वन्यजीव गलियारे से हिचक रहे हाथी-गुलदार

Web Editor
Last updated: 2026/04/03 at 2:45 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Wildlife Corridor on Delhi-Dehradun Expressway Sees Low Elephant, Leopard Movement

देहरादून, 3 अप्रैल 2026। दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे पर मोहंड के पास बनाए गए वन्यजीव गलियारे का इस्तेमाल अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन बड़े वन्यजीव—खासकर हाथी और गुलदार—अभी भी इससे गुजरने में हिचकिचाते नजर आ रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेस-वे के करीब 20 किलोमीटर लंबे हिस्से में से 10 किलोमीटर क्षेत्र को विशेष रूप से वन्यजीव अंडरपास के रूप में विकसित किया गया है। यह इलाका उत्तर प्रदेश के गणेशपुर से लेकर देहरादून तक फैला है और शिवालिक हाथी कॉरिडोर का अहम हिस्सा माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए यह संरचना तैयार की गई।
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने 40 दिनों तक इलाके की लगातार निगरानी की। इसके लिए 150 कैमरा ट्रैप लगाए गए, जिनसे विभिन्न प्रजातियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया। अध्ययन क्षेत्र को तीन अलग-अलग जोन में बांटा गया था, जिनमें समतल और पहाड़ी दोनों प्रकार के भू-भाग शामिल हैं।
रिपोर्ट में सामने आया है कि इस गलियारे का सबसे अधिक उपयोग शाकाहारी जीव कर रहे हैं। नदी किनारे और घने जंगलों वाले हिस्सों में नीलगाय, सांभर और चीतल की गतिविधियां अधिक दर्ज की गईं, जबकि जहां मानव हस्तक्षेप ज्यादा है, वहां बड़े वन्यजीवों की मौजूदगी कम रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े और संवेदनशील वन्यजीव किसी नई संरचना को अपनाने में समय लेते हैं। ऐसे में हाथी और तेंदुए की कम मौजूदगी फिलहाल स्वाभाविक मानी जा रही है। यदि क्षेत्र में मानव गतिविधियों को सीमित किया जाए और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जाए, तो भविष्य में इन बड़े जीवों की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
मोहंड का यह वन्यजीव गलियारा जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर कई प्रजातियां तेजी से इस नए ढांचे के साथ अनुकूल हो रही हैं, वहीं कुछ को अभी और समय की जरूरत है।

शाकाहारी जीवों की बढ़ी सक्रियता
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, नीलगाय की 12,432 और सांभर की 10,534 बार मौजूदगी दर्ज की गई। इसके अलावा चीतल भी 8,015 बार कैमरा ट्रैप में कैद हुआ, जो इस गलियारे के प्रति उनकी बढ़ती स्वीकृति को दर्शाता है।

: बड़े वन्यजीवों की सीमित मौजूदगी
वहीं हाथियों की उपस्थिति केवल 300 बार दर्ज की गई, जबकि तेंदुए (गुलदार) की मौजूदगी महज 25 बार रिकॉर्ड हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव आने में समय लगता है, इसलिए उनकी कम उपस्थिति फिलहाल चिंता का विषय नहीं है।

You Might Also Like

12वीं के छात्रों को ट्रैफिक नियम सिखाएगी देहरादून पुलिस, होगी विशेष कार्यशाला

पक्षियों की रंग-बिरंगी दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटो प्रदर्शनी ने बढ़ाई प्रकृति संरक्षण की समझ

अब जंगल के पड़ोस में जीना सीखेंगे लोग, वन्य जीवों से संघर्ष रोकने को बनेगी नई रणनीति

उत्तराखंड में 2000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी

सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता से मिलती है सफलता की राह : योगी आदित्यनाथ

TAGGED: A study by the Wildlife Institute of India reveals herbivores are активно using the Delhi-Dehradun expressway wildlife corridor, while elephants and leopards remain hesitant.
Web Editor April 3, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article भालू के हमले से टिहरी में फारेस्टर समेत तीन घायल
Next Article उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदला, छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

12वीं के छात्रों को ट्रैफिक नियम सिखाएगी देहरादून पुलिस, होगी विशेष कार्यशाला
उत्तराखंड May 13, 2026
पक्षियों की रंग-बिरंगी दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटो प्रदर्शनी ने बढ़ाई प्रकृति संरक्षण की समझ
उत्तराखंड May 10, 2026
अब जंगल के पड़ोस में जीना सीखेंगे लोग, वन्य जीवों से संघर्ष रोकने को बनेगी नई रणनीति
उत्तराखंड May 8, 2026
उत्तराखंड में 2000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी
उत्तराखंड May 8, 2026

Recent Posts

  • 12वीं के छात्रों को ट्रैफिक नियम सिखाएगी देहरादून पुलिस, होगी विशेष कार्यशाला
  • पक्षियों की रंग-बिरंगी दुनिया से रूबरू हुए छात्र, फोटो प्रदर्शनी ने बढ़ाई प्रकृति संरक्षण की समझ
  • अब जंगल के पड़ोस में जीना सीखेंगे लोग, वन्य जीवों से संघर्ष रोकने को बनेगी नई रणनीति
  • उत्तराखंड में 2000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी
  • सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता से मिलती है सफलता की राह : योगी आदित्यनाथ

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • मक्‍की की वजह से पर्यटन के नक्‍शे पर आया यह गांव (6,184)
  • राज्य में 12 पी माइनस थ्री पोलिंग स्टेशन बनाए गए (6,051)
  • टिहरी राजपरिवार के पास 200 करोड से अधिक की संपत्ति (4,557)
  • कम मतदान प्रतिशत वाले बूथों पर जनजागरूकता में जुटा चुनाव आयोग (4,437)
  • प्रधानमंत्री माेदी और गृह मंत्री शाह जल्‍द आएंगे उत्‍तराखंड (4,328)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?