Spreading Wrong Information During Disasters Can Be Fatal, Says Dehradun Information Officer
देहरादून, 4 अक्टूबर 2025 : आपदा के दौरान गलत सूचना का प्रसार बेहद घातक होता है, जबकि सही सूचना पीड़ितों के दर्द को कम कर सकती है।” यह बात जिला सूचना अधिकारी बद्री प्रसाद नेगी ने शनिवार को आयोजित एक विचार गोष्ठी में कही। उत्तराखंड पत्रकार यूनियन, जिला इकाई देहरादून द्वारा “आपदा और मीडिया का दायित्व” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से बढ़ा है, ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
नेगी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र का दायित्व है कि पत्रकारों को समय पर सही सूचना उपलब्ध कराई जाए, ताकि तथ्यपरक रिपोर्टिंग की जा सके। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रशासनिक तंत्र ने हाल की आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में कोई कमी नहीं रखी। जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं प्रभावित इलाकों में डटे रहे, जिससे राहत कार्य समय पर पहुंच सके।
कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी ने कहा कि सरकार को भी चाहिए कि आपदा के दौरान पत्रकारों को समय रहते सटीक जानकारी दे, जिससे अफवाहें न फैलें। उन्होंने पारंपरिक पहाड़ी निर्माण पद्धतियों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि पुराने नियमों के अनुसार आवास निर्माण से आपदा जनित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार गौरव गुलेरिया ने कहा कि नदियों के बीच में हो रहे अवैध निर्माण कार्य आपदाओं की जड़ हैं। यदि सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह होगी। वहीं, योगेश रतूड़ी ने आपदा कवरेज के दौरान पत्रकारों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की आवश्यकता बताई।
संजय किमोठी ने कहा कि बदलती डेमोग्राफी और बिना नियोजन के हो रहे निर्माण आपदाओं को बढ़ा रहे हैं। सरकारों को उत्तराखंड की पारंपरिक बस्ती व्यवस्था से सीख लेकर नीतियां बनानी चाहिए। तिलक राज ने कहा कि खबरों में संवेदनशीलता रखनी जरूरी है और सनसनी से बचना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. विनोद पोखरियाल, नीरज कोहली और इंद्रेश कोहली ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को आपदाग्रस्त क्षेत्रों को “आपदा संभावित क्षेत्र” घोषित कर वहां निर्माण रोकना चाहिए।
गोष्ठी में वक्ताओं ने एकमत से कहा कि आपदा से पहले जागरूकता, आपदा के दौरान सटीक सूचना और आपदा के बाद राहत कार्यों पर निगरानी—ये तीनों ही चरण मीडिया की असली जिम्मेदारी हैं। कार्यक्रम में संतोष चमोली, विपनेश गौतम, दरबान सिंह गड़िया, एम.सी. जोशी, के.एस. बिष्ट, किशोर रावत और अन्य वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।
