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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > पांडुकेश्वर से डिमर गांव के लिए रवाना हुआ गाडू घड़ा, बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू
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पांडुकेश्वर से डिमर गांव के लिए रवाना हुआ गाडू घड़ा, बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू

Web Editor
Last updated: 2026/01/21 at 8:44 AM
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Gadu Ghada Yatra Begins | Badrinath Dham Kapat Opening Process Starts

गोपेश्वर, 21 जनवरी2026 । बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इसी क्रम में कपाट उद्घाटन से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का प्रतीक ‘गाडू घड़ा’ यानी तेल कलश बुधवार को पांडुकेश्वर गांव से डिमर गांव के लिए रवाना किया गया। गाडू घड़े की यह यात्रा बदरीनाथ धाम के वार्षिक धार्मिक अनुष्ठानों की पहली और सशक्त कड़ी मानी जाती है। गौरतलब है कि बसंत पंचमी के पावन पर्व पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त तय किए जाएंगे।
डिमरी पंचायत की ओर से आयोजित इस यात्रा की शुरुआत पांडुकेश्वर स्थित नृसिंह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। मंदिर परिसर में विधिवत अनुष्ठान के बाद तेल कलश को डोली में विराजमान कर डिमर गांव के लिए प्रस्थान कराया गया। इस अवसर पर स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीतों का गायन किया और पुष्प वर्षा कर गाडू घड़े को भावपूर्ण विदाई दी। पूरा वातावरण श्रद्धा, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत नजर आया।
जानकारी के अनुसार तेल कलश 22 जनवरी को नरेंद्र नगर पहुंचेगा। यहां 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन राजदरबार में राजपुरोहितों द्वारा पंचांग गणना के आधार पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की शुभ तिथि और मुहूर्त की घोषणा की जाएगी। इस अवसर पर गाडू घड़े की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है, इसलिए इसकी यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।
कम्दी थोक पांडुकेश्वर के अध्यक्ष जगदीश पवार ने बताया कि भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने से जुड़ी सभी परंपराओं का निर्वहन श्रद्धा और शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गाडू घड़े का पहला भोग पांडुकेश्वर में पंवार खानदान के बारीदार नरेश पंवार के निवास पर लगाया गया, जहां विधिवत पूजा संपन्न कराई गई। इसके पश्चात योगध्यान बदरी में गाडू घड़े का उत्सव डोली के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शीतकाल के दौरान भगवान बदरी विशाल की पूजा पांडुकेश्वर में ही होती है। यहां कुबेर और उद्धव जी की मूर्तियों की नियमित आराधना की जाती है, जबकि ज्योतिर्मठ में केवल रावल जी की पालकी जाती है। इसी कारण पांडुकेश्वर को बदरीनाथ धाम की शीतकालीन धार्मिक राजधानी के रूप में विशेष महत्व और सम्मान प्राप्त है।
इस मौके पर सतीश डिमरी ने बताया कि ‘कंदी थोक’ द्वारा गाडू घड़े की पूजा पूरे विधि-विधान से संपन्न कराई गई। भगवान के लिए विशेष भोग तैयार कर अर्पित किया गया और उसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूजा-अर्चना और प्रसाद ग्रहण के उपरांत तेल कलश की यात्रा अपने अगले पड़ाव डिमर गांव के लिए आगे बढ़ी।
इस पावन अवसर पर हेमचंद्र डिमरी, सतीश चंद्र डिमरी, सुधीर डिमरी, संदीप डिमरी, अध्यक्ष कम्दी थोक जगदीश पंवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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Web Editor January 21, 2026
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