IIT Roorkee Develops Advanced Antibody Library for Faster and Affordable Treatment
देहरादून, 02 February 2026 । देश के अग्रणी तकनीकी संस्थान Indian Institute of Technology Roorkee ने स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक एंटीबॉडी लाइब्रेरी विकसित की है, जिससे आने वाले समय में बीमारियों की पहचान पहले से कहीं अधिक तेज़ होगी और इलाज की लागत भी कम हो सकेगी। यह पहल महामारी जैसी आपात परिस्थितियों में दवाओं और जांच तकनीकों की खोज को गति देने में अहम साबित होगी।
आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह लाइब्रेरी नैनोबॉडी पर आधारित है। नैनोबॉडी आकार में बेहद छोटी, लेकिन प्रभाव में अत्यंत सटीक और मजबूत होती हैं। ये शरीर में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया या कैंसर कोशिकाओं को जल्दी पहचानकर उन पर असर डालती हैं। इस लाइब्रेरी में नैनोबॉडी की बड़ी विविधता मौजूद है, जिससे किसी भी नई या पुरानी बीमारी के लिए उपयुक्त एंटीबॉडी कम समय में चुनी जा सकती है।
अब तक एंटीबॉडी खोजने की प्रक्रिया जटिल, समयसाध्य और महंगी मानी जाती थी। नई लाइब्रेरी के विकसित होने से यह प्रक्रिया सरल और किफायती बन सकेगी। इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि जांच और इलाज समय पर और कम खर्च में उपलब्ध हो पाएंगे। विशेष रूप से संक्रामक रोगों, कैंसर, स्वप्रतिरक्षी रोगों और उभरते वायरस के खिलाफ यह तकनीक प्रभावी मानी जा रही है।
संस्थान के जैवविज्ञान और जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार के अनुसार, यह शोध समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी स्तर पर एंटीबॉडी खोज मंच तैयार होने से भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता घटेगी।
बॉक्स | स्वास्थ्य नवाचार को मिलेगा बल
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के.के. पंत ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इसके तहत एंटीबॉडी आधारित नई तकनीकों का विकास होगा, जिससे भविष्य में बेहतर, तेज़ और सस्ता इलाज संभव हो सकेगा।




