By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: उत्तराखंड में हर साल 4,534 मवेशियों को निगल रहे बाघ और गुलदार 
Share
Notification Show More
Latest News
देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
उत्तराखंड
सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी
Uncategorized
रुरुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें जल्द
उत्तराखंड
ज्योतिर्मठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को किया घायल
उत्तराखंड
उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाले पर एक साल का प्रतिबंध
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में हर साल 4,534 मवेशियों को निगल रहे बाघ और गुलदार 
उत्तराखंड

उत्तराखंड में हर साल 4,534 मवेशियों को निगल रहे बाघ और गुलदार 

Web Editor
Last updated: 2026/07/25 at 5:02 PM
Web Editor
Share
2 Min Read
SHARE

Dehradun, july 2026। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब केवल लोगों की जान का जोखिम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। वन विभाग के अध्ययन के अनुसार वर्ष 2011 से 2025 के बीच 63,478 मवेशी बाघ, गुलदार और अन्य वन्यजीवों का शिकार बने। यानी प्रदेश में हर वर्ष औसतन 4,534 मवेशी वन्यजीवों के हमलों में मारे जा रहे हैं। इससे पशुपालन पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 71.05 प्रतिशत हिस्सा वनाच्छादित है। ऐसे में जंगलों से सटे गांवों में रहने वाले किसान और पशुपालक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। बाघ और गुलदार गाय, भैंस, बैल, भेड़ और बकरियों को लगातार निशाना बना रहे हैं। कई क्षेत्रों में लगातार हो रहे हमलों के कारण लोग अब पशुपालन बढ़ाने से भी हिचकने लगे हैं।

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि अप्रैल 2011 से मार्च 2025 के बीच 18,994 फसल क्षति की घटनाएं दर्ज हुईं। यानी हर साल औसतन 1,356 मामलों में किसानों की फसलें जंगली सूअर, बंदर, लंगूर, हाथी और अन्य वन्यजीवों से बर्बाद हुईं। धान, मक्का, गेहूं, सब्जियां और अन्य नकदी फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं, जिससे किसानों की आय और खेती की लाभप्रदता पर असर पड़ रहा है।

वन विभाग की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2020-21 के बाद हालात और गंभीर हुए हैं। अब प्रतिवर्ष 5,000 से 6,500 तक मवेशी वन्यजीवों के हमलों का शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे प्राकृतिक आवासों पर बढ़ता दबाव और जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों के विस्तार को प्रमुख कारण मानते हैं।

अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) विवेक पांडेय के अनुसार राज्य सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक, सौर ऊर्जा आधारित सुरक्षा प्रणाली, मजबूत बाड़, त्वरित मुआवजा व्यवस्था और स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उनका कहना है कि इन उपायों से ग्रामीणों, पशुधन और फसलों की सुरक्षा को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

You Might Also Like

देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल

रुरुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें जल्द

ज्योतिर्मठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को किया घायल

उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाले पर एक साल का प्रतिबंध

उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने सिंह बिसेन

TAGGED: 534 Livestock Killed Every Year, Uttarakhand Human-Wildlife Conflict: 4
Web Editor July 25, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन, धामी बोले- वीरों का बलिदान हमेशा रहेगा राष्ट्र की प्रेरणा
Next Article MDDA का बड़ा एक्शन, हरिद्वार बाईपास और डोईवाला में तीन अवैध व्यावसायिक निर्माण सील
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
उत्तराखंड October 15, 2026
सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी
Uncategorized October 15, 2026
रुरुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें जल्द
उत्तराखंड October 13, 2026
ज्योतिर्मठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को किया घायल
उत्तराखंड October 13, 2026

Recent Posts

  • देवप्रयाग में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो की मौत; तीन घायल
  • सांपों और मगरमच्छों को हीटर से मिलेगी गर्मी
  • रुरुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें जल्द
  • ज्योतिर्मठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को किया घायल
  • उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाले पर एक साल का प्रतिबंध

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (13,195)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (12,447)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (11,801)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (11,375)
  • 300 रुपये के लिए वृद्ध दंपती समेत तीन को पेचकस से गोदा, मौत (11,224)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?