Mithuna-FS Weather Forecasting System Gives Early Warnings to Uttarakhand
देहरादून, 14 February 2026 : अब मौसम के मिजाज को समझना पहले से कहीं ज्यादा आसान और भरोसेमंद हो गया है। भारत की नई पीढ़ी की पूर्वानुमान तकनीक मिथुना पूर्वानुमान प्रणाली (मिथुना-एफएस) बदलते मौसम के हर संकेत को बारीकी से पढ़ रही है। बादलों की चाल, भारी बारिश, हीट वेव से लेकर तेज तूफानों तक—यह प्रणाली मौसम के हर बदलाव पर नजर रखते हुए समयपूर्व चेतावनी देने में सक्षम बन चुकी है।
मिथुना-एफएस एक अत्याधुनिक वैश्विक संयुक्त मौसम मॉडल है, जिसमें वायुमंडल, महासागर, भूमि सतह और समुद्री बर्फ—चारों घटकों का एक साथ विश्लेषण किया जाता है। इसमें उन्नत भौतिकी और आधुनिक डेटा समेकन तकनीक का उपयोग होता है। उपग्रह, डॉप्लर रडार, स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस), प्रोफाइलर और महासागरीय प्रणालियों से मिलने वाले विशाल आंकड़ों को यह एकीकृत कर अधिक सटीक अनुमान तैयार करता है।
वर्ष 2024–25 के दौरान परीक्षण और प्री-ऑपरेशनल चरणों से गुजरने के बाद यह प्रणाली अब देश की नियमित मौसम चेतावनी व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। फिलहाल मिथुना-एफएस 12 किलोमीटर रेजोल्यूशन पर काम कर रही है, यानी पूरे क्षेत्र को 12×12 किलोमीटर के हिस्सों में बांटकर हर इलाके का अलग-अलग मौसम आकलन किया जाता है। इससे यह साफ पता चल पाता है कि कहां तेज बारिश होगी, कहां हल्की वर्षा रहेगी और किस क्षेत्र में गरज-चमक या तूफान का खतरा है।
पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य उत्तराखंड के लिए यह प्रणाली बेहद उपयोगी साबित हो रही है। यहां कुछ ही किलोमीटर में मौसम बदल जाता है और अचानक बादल फटना, भूस्खलन या मूसलाधार बारिश जैसी घटनाएं सामने आती हैं। मिथुना-एफएस के जरिए अब स्थान-विशिष्ट और समयपूर्व चेतावनियां जारी की जा रही हैं, जिससे आपदा प्रबंधन, प्रशासन, कृषि, सड़क व्यवस्था और तीर्थयात्रा संचालन को पहले से तैयारी का अवसर मिल रहा है।
यह पूरी मौसम चेतावनी व्यवस्था भारत मौसम विभाग द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के ‘मिशन मौसम’ के तहत संचालित की जा रही है। मिशन का उद्देश्य भारत को “मौसम-तैयार और जलवायु-स्मार्ट” राष्ट्र बनाना है। 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, मिथुना-एफएस अब देश की मौसम चेतावनी प्रणाली की मजबूत रीढ़ बन चुकी है, जिससे उत्तराखंड सहित पूरे देश में जान-माल की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।
उत्तराखंड में डॉप्लर मौसम रडार की भूमिका
उत्तराखंड में वास्तविक समय मौसम निगरानी के लिए डॉप्लर वेदर रडार (डीडब्ल्यूआर) अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये रडार बादलों की गति, वर्षा की तीव्रता और गरज-चमक वाले तूफानों की सटीक जानकारी देते हैं। देशभर में सक्रिय 47 डॉप्लर मौसम रडार के जरिए लगभग 87 प्रतिशत क्षेत्र को कवरेज मिल चुका है। उत्तराखंड से मिलने वाला रडार डेटा मिथुना-एफएस जैसे उन्नत मॉडलों में शामिल किया जाता है, जिससे पर्वतीय इलाकों में अचानक आने वाली चरम मौसम घटनाओं की पहले से चेतावनी देना संभव हो पाया है।


