Dehradun 22 june 2026। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (एसजीआरआरआईएमएचएस) के बाल रोग विभाग द्वारा 20 और 21 जून को दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की 6वीं पीडियाट्रिक डायलिसिस एंड थेरेप्यूटिक एफेरेसिस मॉड्यूल फॉर इमरजेंसी (पीडी-टेम) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देशभर से आए बाल रोग विशेषज्ञों, नेफ्रोलॉजिस्टों और चिकित्सा शिक्षकों ने हिस्सा लिया तथा बच्चों में किडनी संबंधी गंभीर एवं आपातकालीन बीमारियों के उपचार की आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एसजीआरआरआईएमएचएस के प्राचार्य प्रो. डॉ. उत्कर्ष शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र वर्मा, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल कौशिक, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रागिनी सिंह, बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. ओ.पी. मिश्रा तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. अभिजीत सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों में तीव्र गुर्दा विकार (एक्यूट किडनी इंजरी), डायलिसिस और थेरेप्यूटिक एफेरेसिस जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं के प्रति चिकित्सकों की दक्षता बढ़ाना था। विशेषज्ञों ने हैंड्स-ऑन सिमुलेशन, मानकीकृत प्रोटोकॉल और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीनतम उपचार पद्धतियों की जानकारी दी।
कोर्स डायरेक्टर एवं बाल नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत साहा ने कहा कि उत्तराखंड में बच्चों की डायलिसिस सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि अधिक चिकित्सकों को पेरिटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस का प्रशिक्षण मिलने से गंभीर रूप से बीमार बच्चों का समय पर उपचार संभव होगा और उन्हें बड़े महानगरों के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता कम होगी।
प्रो. डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक पीडियाट्रिक्स स्नातकोत्तर चिकित्सक को हीमोडायलिसिस और थेरेप्यूटिक एफेरेसिस जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं का मूलभूत ज्ञान होना चाहिए। वहीं दिल्ली से आईं डॉ. प्रेरणा बत्रा ने गंभीर किडनी रोगों से पीड़ित बच्चों में पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासोनोग्राफी (पीओकस) और मैकेनिकल वेंटिलेशन पर प्रशिक्षण दिया।
आधारशिला ट्रस्ट की ट्रस्टी नीना जॉली ने कहा कि देश के कई जिलों में बच्चों में एक्यूट किडनी इंजरी की समय पर पहचान और उपचार सुविधाओं का अभाव चुनौती बना हुआ है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण को बच्चों की जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
आयोजकों के अनुसार पीडी-टेम पहल के तहत अब तक देशभर में 300 से अधिक चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। कार्यशाला से बच्चों में किडनी रोगों के उपचार, अस्पतालों की आपातकालीन तैयारी और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप की क्षमता को और मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल कौशिक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसजीआरआरआईएमएचएस में आयोजित हुई 6वीं पीडी-टेम कार्यशाला, बाल किडनी आपात चिकित्सा सेवाओं को सशक्त बनाने पर जोर
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