Dehradun, 22 june 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संत-महात्मा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्र चेतना के वास्तविक संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज ने सदियों से समाज को दिशा देने के साथ राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री सोमवार को हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में संतों और ऋषि-मुनियों ने समाज को मार्गदर्शन देने के साथ सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया है। सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान अतुलनीय रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए दौर का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे कार्य भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से देश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई है और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। देवभूमि की सांस्कृतिक अस्मिता और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लागू किए गए हैं। साथ ही अतिक्रमण हटाने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की गई है, जबकि हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन और आशीर्वाद देने का आग्रह किया।




