Dehradun, 30 June 2026। उत्तराखंड के हिमालयी ग्लेशियरों की मौजूदा स्थिति और जलवायु परिवर्तन का उन पर पड़ रहे प्रभावों की विस्तृत तस्वीर जल्द सामने आएगी। करीब तीन सप्ताह तक चले वैज्ञानिक अभियान के बाद नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व से विशेषज्ञों का दल लौट आया है। अभियान के दौरान जुटाए गए जल, मिट्टी, वनस्पति, भू-विज्ञान और ग्लेशियरों से जुड़े नमूनों व आंकड़ों का अब प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट उत्तराखंड के हिमालयी ग्लेशियरों की “सेहत” का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक दस्तावेज मानी जा रही है।
अभियान का नेतृत्व वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. जी.एस. रावत ने किया। वैज्ञानिकों की टीम मध्य हिमालय के दुर्गम क्षेत्र में स्थित नंदा देवी शिखर के बेस कैंप सरसों पाताल तक पहुंची, जहां ग्लेशियरों की स्थिति का आकलन करने के साथ भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों से जल, मिट्टी और वनस्पतियों के नमूने एकत्र किए गए तथा जैव विविधता और वन्यजीवों से जुड़े आंकड़े भी जुटाए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी ग्लेशियर गंगा सहित उत्तराखंड की अधिकांश नदियों के प्रमुख जल स्रोत हैं। ग्लेशियरों में तेजी से हो रहे बदलाव भविष्य में पेयजल, सिंचाई, जलविद्युत परियोजनाओं और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह अध्ययन राज्य की जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैज्ञानिक दल में डॉ. सुनील सिंह शाह, कार्तिकेय बिष्ट, डॉ. अयान नस्कर, रितेश गौतम, डॉ. मनीष त्रिपाठी, दलबीर एस. फरस्वाण और डॉ. अमित शामिल रहे। सभी नमूनों और फील्ड डेटा का विस्तृत विश्लेषण पूरा होने के बाद रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में संरक्षण और नीति निर्माण के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध होगा।
दस साल पुराने आंकड़ों से होगी तुलना
प्रो. जी.एस. रावत ने बताया कि इस अभियान में जुटाए गए आंकड़ों का मिलान वर्ष 2016 में किए गए सर्वेक्षण से किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि पिछले एक दशक में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों, जैव विविधता और उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में कितना बदलाव आया है। अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य की संरक्षण योजनाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान में अहम भूमिका निभाएंगे।
सात जून को शुरू हुआ था अभियान
उत्तराखंड वन विभाग के सहयोग से आयोजित यह अभियान सात जून को जोशीमठ से रवाना हुआ था। अभियान को वन मंत्री सुबोध उनियाल और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने हरी झंडी दिखाई थी। इसका संचालन नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के उप निदेशक अभिमन्यु सिंह (आईएफएस) की देखरेख में किया गया। अभियान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और उत्तराखंड वन विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से भागीदारी की।
जल्द जारी होगी हिमालयी ग्लेशियरों की हेल्थ रिपोर्ट
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