Dehradun, 27 June 2026: भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील उत्तराखंड में वर्ष 2026 के पहले छह महीनों के दौरान धरती 33 बार कांपी। हालांकि इनमें से किसी भी झटके से बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन विशेषज्ञ इसे हिमालयी क्षेत्र की लगातार सक्रिय भूगर्भीय हलचलों का संकेत मान रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में औसतन हर पांच से छह दिन के अंतराल पर भूकंप दर्ज हुआ। राहत की बात यह रही कि अधिकांश भूकंपों की तीव्रता 2.3 से 3.9 के बीच रही। तुलना करें तो वर्ष 2025 में पूरे साल राज्य में 45 भूकंप रिकॉर्ड किए गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड का अधिकांश भाग भूकंप के उच्च जोखिम वाले जोन में स्थित है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर टक्कर के कारण हिमालय आज भी भूगर्भीय रूप से सक्रिय है। इसी वजह से यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार छोटे भूकंप सामान्य भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन इससे बड़े भूकंप की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान विज्ञान भी भूकंप आने का सटीक समय बताने में सक्षम नहीं है, इसलिए सतर्कता और तैयारी ही सबसे प्रभावी उपाय मानी जाती है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में नियमित मॉक ड्रिल, स्कूलों और अस्पतालों में आपदा सुरक्षा अभ्यास तथा संवेदनशील भवनों का संरचनात्मक ऑडिट लगातार किया जाना चाहिए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के बीच भूकंपरोधी निर्माण मानकों का सख्ती से पालन भविष्य में संभावित नुकसान को काफी कम कर सकता है। साथ ही लोगों को परिवार स्तर पर आपदा योजना तैयार करने और सुरक्षित स्थानों की जानकारी रखने के लिए भी जागरूक किया जाना आवश्यक है।
बॉक्स: हिमालय में भूकंपीय गतिविधि स्वाभाविक
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व निदेशक डॉ. कलाचंद का कहना है कि छोटे-छोटे भूकंपों के आधार पर किसी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। उनके अनुसार हिमालय एक सक्रिय पर्वतमाला है, जहां भूकंपीय गतिविधियां लगातार होती रहती हैं। इसलिए प्राथमिकता भूकंपरोधी भवन निर्माण, भवन उपविधियों के कड़ाई से पालन और लोगों में आपदा जागरूकता बढ़ाने पर होनी चाहिए।
बॉक्स: छह माह में भूकंप का रिकॉर्ड
जनवरी : 2
फरवरी : 3
मार्च : 5
अप्रैल : 13
मई : 6
जून : 4
उत्तराखंड में छह माह में 33 बार कांपी धरती, अप्रैल में सबसे ज्यादा महसूस हुए झटके
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