Dehradun, 26 july 2026। उत्तराखंड में मौसम की सटीक जानकारी अब गांव स्तर तक उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार की मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS) के तहत राज्य में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) लगाए जा रहे हैं। यह नेटवर्क बदलते मौसम पर लगातार नजर रखेगा और किसानों से लेकर आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक सभी को रियल टाइम मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराएगा। इससे खेती की बेहतर योजना बनाने, फसल बीमा के नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने और प्राकृतिक आपदाओं से समय रहते निपटने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड देश के उन सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है, जहां पहले चरण में WINDS परियोजना लागू की जा रही है। इस सूची में असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। परियोजना का उद्देश्य देशभर में मौसम संबंधी आंकड़ों का मजबूत और भरोसेमंद नेटवर्क तैयार करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम पूर्वानुमान संभव हो सके।
देशभर में अब तक 16,843 स्थानों पर ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित करने की मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 892 उपकरणों की स्थापना भी की जा चुकी है। आने वाले समय में इस नेटवर्क का और विस्तार किया जाएगा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, WINDS नेटवर्क मौसम आधारित कृषि को मजबूत करेगा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल नुकसान के आकलन को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाएगा। इसके साथ ही बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और अत्यधिक वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी तथा समय रहते चेतावनी जारी करने में भी यह प्रणाली अहम भूमिका निभाएगी। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में इसका लाभ विशेष रूप से देखने को मिलेगा, जहां कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही मौसम तेजी से बदल जाता है।
ऐसे काम करेगा WINDS
WINDS के तहत लगाए जाने वाले ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा, वायुदाब सहित कई मौसम संबंधी आंकड़े स्वतः रिकॉर्ड करेंगे। वहीं ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) किसी क्षेत्र में हुई वर्षा की सटीक मात्रा मापेंगे। इन दोनों उपकरणों से प्राप्त डेटा सीधे केंद्रीय सर्वर पर पहुंचेगा, जहां उसका विश्लेषण कर हाइपर-लोकल मौसम पूर्वानुमान तैयार किया जाएगा। यानी गांव या छोटे क्षेत्र के स्तर तक मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
किसानों और आपदा प्रबंधन को होगा बड़ा लाभ
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश में यह नेटवर्क किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। मौसम की अग्रिम जानकारी मिलने से किसान बुवाई, सिंचाई, दवा छिड़काव और फसल कटाई का सही समय तय कर सकेंगे। वहीं भारी बारिश, ओलावृष्टि और खराब मौसम की पूर्व चेतावनी मिलने से फसलों के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रशासन को भी आपदा प्रबंधन की तैयारी समय रहते करने का अवसर मिलेगा, जिससे जन-धन की हानि कम की जा सकेगी।




