Dehradun, 02 September 2026। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर लागू नई व्यवस्था के बाद प्रशासन ने नियमों के अनुपालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन ने बिना निर्धारित मान्यता और जरूरी दस्तावेजों के संचालित पाए गए चार मदरसों को सील कर दिया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में संचालित अन्य मदरसों में भी मान्यता, दस्तावेज और शैक्षणिक मानकों को लेकर जांच तेज हो गई है।
जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की कार्रवाई की गई। प्रशासन के मुताबिक निरीक्षण के दौरान संबंधित मदरसा संचालक संस्थानों के संचालन के लिए आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित मान्यता से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए चारों संस्थानों को सील कर दिया गया।
प्रशासन की कार्रवाई की जद में मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, बाजपुर, मदरसा गुलशने इस्लाम, कनोरा, मदरसा जामिया फातिमा, बाजपुर और मदरसा मोइनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलाखेड़ा-बाजपुर शामिल हैं।
एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र के मदरसों का निरीक्षण किया जा रहा है। जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अन्य संस्थानों की भी जांच की जा रही है।
नई व्यवस्था पर हाई कोर्ट में चुनौती
राज्य में मदरसा शिक्षा के लिए लागू नई व्यवस्था को लेकर कानूनी चुनौती भी सामने आई है। कुछ मदरसा संचालकों ने नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मान्यता संबंधी नए प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के कारण कई संस्थानों के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। प्रारंभिक सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है।
मान्यता और मानकों का पालन जरूरी : डीएम
ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि शासन के निर्देशों के तहत जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान चल रहा है। निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेने अथवा आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक पहचान के साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है। इसके तहत विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और अन्य आधुनिक विषयों को शिक्षा व्यवस्था में महत्व दिया जा रहा है। सरकार का जोर शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने पर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित नियमों और कानूनों का पालन करना होगा। सरकार के अनुसार नई व्यवस्था बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के साथ आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा के अवसरों से जोड़ने की दिशा में है। नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को व्यवस्था के तहत संचालन का अवसर मिलेगा, जबकि मानकों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।




