Dehradun, 31 August 2026 । पहाड़ के गांवों में चूल्हे की आंच अब सिर्फ परिवार का पेट नहीं भर रही, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रही है। थौलधार विकासखंड के भैंसकोटी गांव की सात महिलाओं ने घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अपने हुनर को कारोबार का रूप देकर यह साबित किया है। राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुंतला देवी आज बेकरी उद्यम के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं।
इन महिलाओं ने जनवरी 2026 में दिव्य ग्राम संगठन के माध्यम से बेकरी यूनिट की शुरुआत की। शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह से जुड़ी महिलाओं को ग्रामोत्थान परियोजना का सहयोग मिला। परियोजना सर्वेक्षण और भौतिक सत्यापन के बाद छह लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके साथ महिलाओं ने तीन लाख रुपये का बैंक ऋण और एक लाख रुपये स्वयं का अंशदान जुटाया। कुल 10 लाख रुपये की लागत से मशीनों और आवश्यक उपकरणों से लैस बेकरी तैयार हुई।
शुरुआत में सीमित उत्पादन से निकलीं महिलाएं अब बाजार की मांग के मुताबिक मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक तैयार कर रही हैं। थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों तक उनके उत्पाद पहुंच रहे हैं। स्थानीय अनाज और मशरूम से बने उत्पादों ने बेकरी को अलग पहचान दी है।
प्रभारी परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ज्योति के अनुसार ग्रामोत्थान परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनकी क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है। भैंसकोटी की महिलाओं का उद्यम इसका प्रभावी उदाहरण है।
हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की आय इस कारोबार को मजबूती दे रही है, जिसमें करीब 30 से 40 हजार रुपये शुद्ध लाभ बच रहा है। अब सातों उद्यमियों की नजर उत्पादन बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर है। साथ ही वे गांव की अन्य महिलाओं को भी इस सफर से जोड़ना चाहती हैं।
बॉक्स | पहाड़ के स्वाद से बनी पहचान
मंडुवा और मशरूम जैसे स्थानीय उत्पादों को बिस्किट में शामिल कर महिलाओं ने पारंपरिक स्वाद को बाजार की जरूरत से जोड़ा है। यही प्रयोग उनकी बेकरी को दूसरे उत्पादों से अलग पहचान दे रहा है।




