Dehradun, 02 September 2026 : उत्तराखंड के तेजी से बढ़ते शहरों में अब विकास का फोकस केवल सड़क, भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं पर भी होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के सभी शहरों में सिटी पार्क अनिवार्य रूप से विकसित करने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य शौचालय के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। सरकार ने अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के अधीन सभी विकास प्राधिकरणों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास योजनाओं में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी सोच के तहत शहरों में पार्क जैसी हरित सार्वजनिक जगहों के साथ महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक शौचालय उपलब्ध कराना जरूरी है।
सिटी पार्क सिर्फ हरियाली नहीं, नागरिक सुविधा का केंद्र
उत्तराखंड के शहरों में बढ़ते शहरीकरण के बीच खुले और हरित स्थानों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सिटी पार्कों को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित रखने के बजाय इन्हें नागरिक सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी है। पार्कों में बैठने की व्यवस्था, हरियाली और मनोरंजन के साथ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर सिटी पार्क में पिंक टॉयलेट की सुविधा अनिवार्य होगी। इसके अलावा शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार अलग से पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएंगे। इससे बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख आवागमन वाले क्षेत्रों में महिलाओं को स्वच्छ और सुलभ शौचालय उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम होगा।
15 अक्टूबर तक बदलेगा शहरों का स्वरूप
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों को शहरों के सौंदर्यीकरण में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसी महीने से बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण के कार्य शुरू किए जाएं और 15 अक्टूबर तक इन्हें पूरा किया जाए। कार्यों का स्वरूप G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण की तर्ज पर आकर्षक और प्रभावी रखने को कहा गया।
प्राधिकरण क्षेत्रों की सभी खराब सड़कों को भी अगले 15 दिनों में दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय हो और संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाए।
पार्किंग संकट के लिए मल्टी-लेवल और PPP मॉडल
देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पर्याप्त पार्किंग सुविधा से वंचित नगर निकायों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। MDDA और HRDA को मल्टी-लेवल, सरफेस और पेरीफेरल पार्किंग के साथ PPP मॉडल पर कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
वहीं अवैध निर्माण पर निगरानी के लिए प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard बनाया जाएगा। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी। GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन के माध्यम से शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण चिन्हित करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समयबद्ध विकास, बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं और पारदर्शी व्यवस्था ही शहरी विकास की असली कसौटी होगी।




