Dehradun, 10 October 2026। सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार को धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस अवसर पर पांच हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र धाम में मौजूद रहे। गुरु महाराज के जयकारों, गुरबाणी, शबद-कीर्तन और अंतिम अरदास के बीच कपाट बंद होने की प्रक्रिया संपन्न हुई। इस वर्ष यात्रा के दौरान 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब पहुंचकर मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की।
कपाट बंद होने के पावन अवसर पर सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। सबसे पहले सुखमणी साहिब का पाठ किया गया। इसके बाद रागी जत्थों ने शबद-कीर्तन के माध्यम से संगत को गुरु भक्ति में सराबोर किया। अंतिम अरदास के बाद हुक्मनामा लिया गया। इसके पश्चात गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। इसी के साथ हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए।
इस वर्ष हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 22 मई को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए थे। यात्रा शुरू होने के बाद से ही देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस पवित्र स्थल पर श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की। कपाट बंद होने के बाद संगत ने अगले यात्रा सीजन में फिर से दर्शन करने की कामना की।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने गोविंदघाट के प्रभारी निरीक्षक चित्रगुप्त सिंह और घांघरिया चौकी प्रभारी अमनदीप सिंह के सहयोग की सराहना की। इस दौरान ट्रस्ट के मैनेजर मोनू सिंह, ग्रंथी हामिद सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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40 पाकिस्तानी श्रद्धालुओं ने भी टेका मत्था
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के अवसर पर पाकिस्तान से आए करीब 40 श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाया। पपिंद्र सिंह के नेतृत्व में यह जत्था गुरुवार रात ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब पहुंचा था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम की यात्रा की। बर्फ से ढकी सप्तश्रृंग घाटी के मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के बीच श्रद्धालु गुरु भक्ति में लीन नजर आए। कपाट बंद होने के अवसर पर शामिल होकर उन्होंने आध्यात्मिक शांति और सेवा भावना के साथ अपनी यात्रा पूरी की।




