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पतंजल‍ि के भ्रामक विज्ञापन मामले में प्रदेश के अफसर भी फंसे, अदालत से की क्षमा याचना

Web Editor
Last updated: 2024/04/11 at 4:27 AM
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देहरादून : बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन के मामले में उत्तराखंड के अफसर भी लपेटे में आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक एड मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की नई माफी को अस्वीकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्टने वर्ष 2018 से उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के अधिकारियों और जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों से भी जवाब मांगा कि उन्होंने गुमराह करने वालों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इस दौरान कोर्ट के समक्ष पेश हुए उत्तराखंड के अधिकारी हाथ जोड़ते हुए क्षमा याचना करते नजर आए। प्रकरण में अगली सुनवाई अब 16 अप्रैल को की जाएगी।

उत्तराखंड के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के संयुक्त निदेशक डॉ मिथिलेश कुमार ने कोर्ट के समक्ष हाथ जोड़कर याचना करते हुए कहा कि उन्हें बक्श दीजिए। वह जून 2023 में पड़ पर आए और यह सब उनके आने से पहले हुआ था। कोर्ट ने प्रकरण में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्योंकि, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। कोर्ट ने आगे कहा, ‘हम उन एफएमसीजी’ के बारे में भी चिंतित हैं, जो नागरिकों को उनके उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यह खामी आपकी कंपनी की कीमत पर नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य की कीमत पर है। कोर्ट ने पतंजलि के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों पर चुप्पी साधने के लिए उत्तराखंड सरकार को भी फटकार लगाई।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने लाइसेंसिंग प्राधिकरण में शामिल रहे मिथिलेश कुमार की ओर से दायर एक हलफनामे पर कहा कि पांच वर्षों में प्राधिकरण नींद में रहा। देखा गया कि कैसे कार्रवाई के लिए फाइल जिला आयुर्वेदिक अधिकारी से लेकर लाइसेंसिंग अधिकारी व केंद्र सराकर के आयुष मंत्रालय के बीच घूमती रही। मिथिलेश कुमार को लेकर कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी के सभी पूर्ववर्ती अपने कार्यकाल के दौरान समान रूप से भागीदार रहे।

कार्रवाई करने की जगह अधिकारियों ने केंद्र सरकार को सूचित किया कि दिव्य फार्मेसी को चेतावनी जारी की गई है और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के क्रम में आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान अभिसाक्षी यानी मिथलेश कुमार के पूर्ववर्ती अधिकारियों को अपने कार्यकाल में स्वयं की ओर से निष्क्रियता को स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करना होगा। वर्ष 2018 से अब तक के सभी संबंधित जिला आयुर्वेदिक अधिकारी भी अपनी निष्क्रियता बताते हुए हलफनामा दाखिल करेंगे। अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने दो सप्ताह का समय दिया।

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की ओर से कोर्ट में पेश ह्यूए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और बलबीर सिंह ने कहा कि यदि अदालत उनके हलफनामे से संतुष्ट नहीं है तो रामदेव और बालकृष्ण सार्वजिनक रूप से माफी मांगने को तैयार हैं। साथ ही कहा गया कि अदालत को दिए वचन के उल्लंघन में भविष्य में कोई विज्ञापन या बयान जारी नहीं किया जाएगा। इससे पहले बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने अपने पहले हलफनामे को वापस लेते हुए 06 अप्रैल को नया हलफनामा दाखिल किया था। हालांकि, कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि यह अकेले अवमानना के बारे में नहीं है, बल्कि जनता के बीच एक बड़ा संदेश जाना चाहिए। अदालत को दिए गए वचन का महत्व होता है और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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