Dehradun Clock Tower Restored: Historical Landmark Ticks Again
देहरादून, 9 नवंबर 2025 : दून की धड़कन एक बार फिर से चल पडी है। राजधानी की पहचान घंटाघर की घड़ी में बार-बार आ रही खराबी और गलत समय बताने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने इसे ठीक कराने के लिए पहल की। प्रशासन ने इसके लिए धनराशि आवंटित की और घड़ी की मरम्मत की जिम्मेदारी चेन्नई की विशेषज्ञ फर्म ‘इंडियन क्लॉक्स’ को सौंपी, जिसके बाद अब घंटाघर की रुकी हुई सुइयां एक बार फिर सही समय दर्शाने लगी हैं।
दरअसल, लंबे समय से घंटाघर की घड़ी की सुइयां समय गलत दर्शा रही थीं। बाद में यह ठहर गईं। इससे लोगों ने जिलाधकिारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ कंपनी के इंजीनियर्स से कार्य कराने के निर्देश दिए। चेन्नई की विशेषज्ञ फर्म ‘इंडियन क्लॉक्स’ के इंजीनियर्स ने जांच के दौरान पाया कि घड़ी के वायर खराब हो चुके थे, साथ ही जीपीएस , लाउडस्पीकर और बेल (घंटी) के सिस्टम में भी खराबी आ गई थी। फर्म ने जीपीएस, तार, लाउडस्पीकर और घंटी सहित सभी खराब कंपोनेंट्स को बदल दिया है। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद अब घडियां ठीक से काम कर रही है।
षट्कोणीय संरचना वाला एशिया का एकमात्र घंटाघर
दून का घंटाघर, जिसे पहले ‘बलबीर क्लॉक टावर’ के नाम से जाना जाता था, शहर की ऐतिहासिक पहचान है। इसका शिलान्यास उत्तर प्रदेश की तत्कालीन गवर्नर सरोजिनी नायडू ने 24 जुलाई 1948 को किया था। यह वर्ष 1953 में बनकर तैयार हुआ और इसका उद्घाटन तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया । यह टावर अपनी षट्कोणीय संरचना के लिए प्रसिद्ध है, जिसके छहों मुखों पर एक-एक घड़ी लगी हुई है। इसे एशिया का एकमात्र षट्कोणीय घंटाघर भी कहा जाता है। इसकी मूल घड़ियाँ स्विट्जरलैंड से लाई गई थीं, जो अपनी सटीकता के लिए विश्व विख्यात हैं। हालांकि, ये घड़ियाँ कालांतर में यांत्रिक रूप से बंद हो गईं, जिसके बाद उन्हें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों से बदला गया।
