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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > एआई युग में भी मानव रचनात्मकता सर्वोपरि: डॉ. रिच मेलहाइम
उत्तराखंड

एआई युग में भी मानव रचनात्मकता सर्वोपरि: डॉ. रिच मेलहाइम

Web Editor
Last updated: 2026/01/19 at 4:09 PM
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Human Creativity Remains Supreme in the AI Era | Dr. Rich Melhei

देहरादून, 19 जनवरी2026 : अमेरिका के प्रसिद्ध न्यूरो एजुकेटर व फ्यूचरिस्ट डॉ. रिच मेलहाइम ने कहा कि एआई और अत्याधुनिक तकनीक के इस दौर में भी मानव रचनात्मकता, संवेदना और सोच की गहराई सर्वोपरि रहेगी। कोई भी मशीन मानवीय समझ और भावनात्मक बुद्धिमत्ता का पूर्ण रूप से स्थान नहीं ले सकती।
सोमवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में “एआई और मेटावर्स के युग में उद्यमिता” विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एआई उन युवाओं के लिए अवसरों का महासागर है, जो भविष्य-उन्मुख कौशल विकसित करने के लिए तैयार हैं। आज दुनिया एआई क्रांति के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां एआई इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और इनोवेशन आधारित स्टार्टअप्स करियर व उद्यमिता की नई दिशा तय करेंगे।
डॉ. मेलहाइम ने कहा कि फोकस, क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता और सहानुभूति आने वाले समय के सबसे शक्तिशाली कौशल होंगे। नई सोच, मौलिक कल्पना और मानवीय संवेदना ही मनुष्य को तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता बनाती है। उन्होंने “एआई प्रूफ उद्यमिता” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्व-स्तरीय उत्पाद, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और विशिष्ट विशेषज्ञता ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें एआई कभी पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे एआई को प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में अपनाएं और अपने विचारों को नवाचार से जोड़ें। सही दृष्टिकोण, स्पष्ट सोच और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ने वाले युवा ही भविष्य की एआई-प्रधान दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर डीन ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स डॉ. डी. आर. गंगोडकर, मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के हेड डॉ. विशाल सागर, टीबीआई ग्राफिक एरा की सीईओ शरिश्मा डांगी, इनक्यूबेटर मैनेजर हर्षवर्धन सिंह रावत, क्रापस्टेकल के संस्थापक अनमोल गोगिया सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

जहां समाप्त हो जाती हैं एआई की सीमाएं
डॉ. मेलहाइम ने कहा कि रचनात्मकता वह क्षेत्र है, जहां एआई की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं और मानव मस्तिष्क की असली शक्ति सामने आती है। जिन युवाओं के विचारों में गहराई, सोच में स्पष्टता और दृष्टिकोण में संवेदनशीलता होती है, वही भविष्य में सबसे आगे रहेंगे।

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