IIT Roorkee Develops Antibody Library to Make Disease Detection Faster and Treatment Affordable
देहरादून, 22 जनवरी 2026 : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक उन्नत एंटीबॉडी लाइब्रेरी विकसित की है। यह नवाचार बीमारियों की पहचान को आसान बनाने के साथ-साथ इलाज को अधिक सटीक, तेज़ और किफायती बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खास तौर पर महामारी जैसी आपात स्थितियों में नई दवाओं और जांच तकनीकों की खोज अब कम समय में संभव हो सकेगी।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने इस एंटीबॉडी लाइब्रेरी को नैनोबॉडी तकनीक पर आधारित किया है। नैनोबॉडी आकार में बेहद छोटी, लेकिन प्रभाव में अत्यंत शक्तिशाली होती हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया और कैंसर कोशिकाओं जैसे रोगकारक तत्वों को तेजी से पहचान कर उन पर सटीक असर डालती हैं। इस लाइब्रेरी में हजारों तरह की नैनोबॉडी संग्रहीत हैं, जिससे किसी भी नई या जटिल बीमारी के लिए उपयुक्त एंटीबॉडी का चयन कुछ ही समय में किया जा सकेगा।
अब तक नई एंटीबॉडी खोजने की प्रक्रिया में वर्षों का समय और भारी लागत लगती थी, लेकिन इस नई प्रणाली से शोध की गति कई गुना बढ़ जाएगी। इसका सीधा लाभ यह होगा कि देश किसी भी स्वास्थ्य संकट का तेजी से सामना कर सकेगा और मरीजों को समय पर जांच व इलाज की सुविधा मिल पाएगी।
यह तकनीक संक्रामक रोगों, कैंसर, स्वप्रतिरक्षी रोगों और उभरते वायरस के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है। इससे न केवल इलाज बेहतर होगा, बल्कि जांच प्रणाली भी सरल और सस्ती बनेगी। चूंकि यह शोध पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है, इसलिए इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती मिलेगी।
आईआईटी रुड़की के जैवविज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार ने बताया कि यह शोध समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी स्तर पर एंटीबॉडी खोजने की यह व्यवस्था भारत को चिकित्सा अनुसंधान में आत्मनिर्भर बनाएगी और विदेशों पर निर्भरता को कम करेगी।
यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और नवाचार से जुड़े उद्देश्यों के अनुरूप है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को भी नई दिशा देती है।
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स्वास्थ्य नवाचार को मिलेगी नई पहचान: निदेशक
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि वैज्ञानिक शोध और उद्योग के सहयोग से समाज के लिए बड़े समाधान निकाले जा सकते हैं। इससे भारत को स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए आईआईटी रुड़की ने आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। दोनों संस्थान मिलकर एंटीबॉडी आधारित नई तकनीकों का विकास करेंगे, जिससे भविष्य में बेहतर, तेज़ और सस्ता इलाज संभव हो सकेगा।
