ARIES Scientists Uncover the Mystery Behind Black Hole Flickering
देहरादून, 1 February 2026 । खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल से आने वाली रहस्यमयी टिमटिमाहट (फ्लिकर) के पीछे छिपे कारण को समझने में सफलता प्राप्त की है। ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली संरचनाओं में से एक हैं, जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होता। वैज्ञानिक इनके चारों ओर मौजूद गैस और धूल से निकलने वाले विकिरण के माध्यम से इनके व्यवहार का अध्ययन करते हैं।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन नैनीताल स्थित स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए इस लंबे समय से चले आ रहे रहस्य को सुलझाया है। इस शोध का नेतृत्व संजीत देबनाथ, डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय और प्रियेश कुमार त्रिपाठी ने किया। उनके साथ एमजेपीआरयू बरेली, पोलिश एकेडमी ऑफ साइंसेज और फ्रांस के वैज्ञानिक भी शामिल रहे।
अध्ययन में बताया गया कि ब्लैक होल के चारों ओर गिरने वाला पदार्थ एक गोल संरचना बनाता है, जिसे एक्रिशन डिस्क कहा जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में यह पदार्थ सीधे ब्लैक होल में समाने के बजाय रास्ते में तेज़ झटके या शॉक्स बनाता है। जब डिस्क में घर्षण बढ़ता है और गैस ठंडी होती है, तो ये शॉक्स अस्थिर होकर दोलन करने लगते हैं। यही दोलन विकिरण में उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं, जो टिमटिमाहट के रूप में दिखाई देते हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संभवतः पहला द्वि-आयामी सिमुलेशन है, जिसमें गैस और इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन प्लाज़्मा के माध्यम से ब्लैक होल के पास होने वाले जटिल प्रवाह को समझा गया है।
भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को नई दिशा
यह खोज ब्लैक होल की प्रकृति, उनसे निकलने वाली ऊर्जा और अंतरिक्ष में बनने वाले शक्तिशाली जेट्स को समझने में मददगार साबित होगी। साथ ही, यह भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान के अध्ययनों को नई दिशा प्रदान करेगी।




