Centre Raises Concern Over Char Dham Railway Alignment Near Active Himalayan Fault
देहरादून, 13 Feburary 2026 : चारधाम को रेल नेटवर्क से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर केंद्र सरकार ने सावधानी भरा रुख अपनाया है। रेल मंत्रालय के अनुसार गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्क के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है, लेकिन प्रस्तावित रेलवे अलाइनमेंट के हिमालय के अत्यंत सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र के नजदीक होने से सरकार चिंतित है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह अलाइनमेंट मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) के आसपास पड़ता है, जिसे भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
भूवैज्ञानिक अध्ययनों में बताया गया है कि एमसीटी हिमालय की प्रमुख टेक्टोनिक संरचना है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से लगातार दबाव बनता रहता है। इसी वजह से उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा भूकंप जोन-4 और जोन-5 में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में पूर्व में आए उत्तरकाशी और चमोली जैसे भूकंप भविष्य में भी बड़े झटकों की आशंका को दर्शाते हैं।
केंद्र सरकार का कहना है कि चारधाम रेल परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले केवल तकनीकी ही नहीं, बल्कि भूगर्भीय, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं का भी गहन आकलन किया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण, वन स्वीकृतियां, यूटिलिटी शिफ्टिंग, कानूनी मंजूरियां और पहाड़ी इलाकों में सीमित कार्य अवधि जैसी चुनौतियां परियोजना की लागत और समयसीमा को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एमसीटी के आसपास सुरंग निर्माण और भारी निर्माण कार्य से सूक्ष्म भूकंपीय गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसी कारण सरकार जियोटेक्निकल जांच, सिस्मिक रिस्क असेसमेंट और भूकंप-रोधी डिजाइनों को अनिवार्य बनाने पर जोर दे रही है। केंद्र का साफ संदेश है कि चारधाम रेल कनेक्टिविटी आस्था और सामरिक दृष्टि से अहम है, लेकिन हिमालय जैसे नाजुक क्षेत्र में किसी भी परियोजना को सुरक्षा और वैज्ञानिक मानकों के साथ ही अंतिम रूप दिया जाएगा।


