International Conference on Sustainable Development at SGRR University Dehradun

देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए समाधान
देहरादून,14 February 2026 । श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत भूगोल विभाग द्वारा “सतत विकास लक्ष्यः चुनौतियाँ एवं प्रगति” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन पथरीबाग परिसर स्थित सभागार में हाइब्रिड मोड में किया गया। सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विषय-विशेषज्ञों ने सहभागिता कर सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर गहन मंथन किया।
सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक-आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने सहयोगात्मक अनुसंधान, नीति-निर्माण और वैश्विक सहभागिता को सतत भविष्य की कुंजी बताया।
विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसिडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कुलपति और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच अकादमिक संवाद और नवाचार को नई दिशा देते हैं। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) प्रीति तिवारी ने सतत विकास को मानव समाज के भविष्य से जुड़ा अहम विषय बताते हुए इस प्रकार के आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया। डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) मालविका कांडपाल ने कहा कि इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों में पर्यावरणीय और सामाजिक चेतना विकसित होती है। सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् प्रेम चन्द्र शर्मा ने रसायन-मुक्त खेती और जैविक कृषि को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) मोहन सिंह पंवार, विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, घटती कृषि योग्य भूमि और जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
अंतरराष्ट्रीय सत्र में श्रीलंका, थाईलैंड सहित अन्य देशों के विशेषज्ञों ने वैश्विक सहयोग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता पर अपने शोध प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सम्मेलन में विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


