Urban River Management Plan for Six Uttarakhand Cities in Ganga Basin
उत्तरकाशी, 15 March 2026 । गंगा बेसिन के शहरों में नदी संरक्षण और शहरी विकास को साथ लेकर चलने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत गंगा नदी से जुड़े 27 शहरों के लिए विशेष ‘अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है। इस योजना में उत्तराखंड के गंगोत्री, यमुनोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार, हल्द्वानी-काठगोदाम और रामनगर को शामिल किया गया है। इन शहरों में नदी तटों के संरक्षण, स्वच्छता व्यवस्था और टिकाऊ शहरी विकास की नई रूपरेखा बनाई जाएगी।
योजना की तैयारी के लिए विशेषज्ञ टीमों ने मैदानी सर्वे शुरू कर दिया है। इसी क्रम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की संयुक्त टीम ने उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्र का पांच दिवसीय दौरा किया। टीम ने गंगोत्री क्लस्टर के धराली, मुखबा, बगोरी, हर्षिल और गंगोत्री धाम का स्थलीय निरीक्षण कर नदी तटों की स्थिति, पर्यटन दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों का अध्ययन किया।
विशेषज्ञों ने पाया कि तीर्थ और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ते दबाव के कारण कई स्थानों पर नदी तटों पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी इन क्षेत्रों में बढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में आई आपदा से प्रभावित धराली क्षेत्र का भी निरीक्षण किया गया, जहां नदी किनारे बसे गांवों की संवेदनशीलता सामने आई और सुरक्षित नियोजन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
टीम ने यमुनोत्री क्लस्टर के खरसाली, जानकी चट्टी और यमुनोत्री धाम क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया। यहां नदी किनारों पर अनियंत्रित निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की कमी और तीर्थयात्रा के दौरान बढ़ते कचरे को प्रमुख चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। विशेषज्ञों ने इन क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने, ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और नदी तटों के आसपास नियंत्रित विकास की आवश्यकता बताई।
दौरे के निष्कर्षों पर चर्चा के लिए उत्तरकाशी जिला मुख्यालय में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में बहु-हितधारक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रस्तावित शहरी नदी प्रबंधन योजना के तहत नदी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, जल गुणवत्ता में सुधार, बाढ़ जोखिम प्रबंधन और स्वच्छता अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही नदी आधारित पर्यटन और स्थानीय आजीविका के नए अवसर भी विकसित किए जाएंगे, जिससे गंगा तट के शहरों में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।




