Uttarakhand Allocates 65% Commercial Gas Cylinders to Tourism Sector Amid Supply Revival
देहरादून, 17 मार्च 2026। उत्तराखंड में लंबे समय से चल रही कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी के बीच अब आपूर्ति बहाल करने के साथ ही शासन ने नया कोटा निर्धारण लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था में सबसे अधिक फायदा पर्यटन उद्योग को मिला है, जिसे कुल मिलाकर करीब 65 प्रतिशत सिलेंडरों का आवंटन किया गया है।
सरकार द्वारा जारी एसओपी के अनुसार प्रतिदिन 2650 कमर्शियल सिलेंडर वितरित किए जाएंगे। इनमें रेस्तरां और ढाबों के लिए 37 प्रतिशत तथा होटल और रिजॉर्ट के लिए 28 प्रतिशत कोटा तय किया गया है। इस तरह पर्यटन और उससे जुड़े आतिथ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कुल 65 प्रतिशत सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे राज्य के पर्यटन कारोबार को राहत मिलने की उम्मीद है।
अन्य क्षेत्रों के लिए भी अलग-अलग कोटा निर्धारित किया गया है। फार्मास्यूटिकल और लाइफ सेविंग सेवाओं को 7 प्रतिशत सिलेंडर दिए जाएंगे, ताकि जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों तथा औद्योगिक कैंटीनों के लिए 6 प्रतिशत, छात्रावासों के लिए 6 प्रतिशत, जबकि उद्योगों और लघु उद्योगों को 5 प्रतिशत सिलेंडर आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा छात्र सहायता समूहों के प्रशिक्षण कार्यों के लिए भी 5 प्रतिशत सिलेंडरों का प्रावधान किया गया है।
शासन ने जिलावार वितरण का खाका भी स्पष्ट कर दिया है। राजधानी देहरादून को सबसे अधिक 31 प्रतिशत सिलेंडर मिलेंगे, जो राज्य के प्रमुख पर्यटन और प्रशासनिक केंद्र होने के कारण महत्वपूर्ण है। हरिद्वार और नैनीताल को 13-13 प्रतिशत आवंटन दिया गया है, जबकि ऊधमसिंह नगर को 9 प्रतिशत हिस्सा मिला है।
पहाड़ी जिलों में चमोली को 6 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग को 5 प्रतिशत सिलेंडर दिए जाएंगे। टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा को 4-4 प्रतिशत आवंटन मिला है। वहीं सीमांत जिलों पिथौरागढ़ को 3 प्रतिशत तथा बागेश्वर और चंपावत को 2-2 प्रतिशत सिलेंडरों का कोटा निर्धारित किया गया है।
नई व्यवस्था से एक ओर जहां पर्यटन उद्योग को बड़ा संबल मिलेगा, वहीं अन्य जरूरी क्षेत्रों के लिए भी संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे गैस संकट पर नियंत्रण के साथ ही आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।




