Tehri, 23 june 2026। पहाड़ों से युवाओं के पलायन की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन टिहरी के एक युवा ने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो गांव में रहकर भी दुनिया में पहचान बनाई जा सकती है। प्रतापनगर क्षेत्र के कठुली गांव निवासी रमेश भद्री आज एक जाने-माने एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर (शौकिया खगोलविद) और एस्ट्रोफोटोग्राफर के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उन्होंने अपने सितारों के प्रति प्रेम को न केवल करियर में बदला, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
बचपन में विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित आकाशगंगाओं और तारों की तस्वीरें देखकर रमेश के मन में अंतरिक्ष को जानने की जिज्ञासा पैदा हुई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पुस्तकों, इंटरनेट और स्वअध्ययन के जरिए खगोल विज्ञान, दूरबीन संचालन और एस्ट्रोफोटोग्राफी की बारीकियां सीखीं। वर्षों की मेहनत के बाद आज उनकी खींची गई तस्वीरें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराही जा रही हैं।
रमेश ने अपने शौक को समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रतापनगर में टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी (TSO) की स्थापना की। यह वेधशाला अब उत्तराखंड में उभरते एस्ट्रो टूरिज्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। यहां आयोजित स्टारगेजिंग कार्यक्रमों और विज्ञान कार्यशालाओं में पर्यटक दूरबीन से शनि के छल्ले, बृहस्पति के उपग्रह, नीहारिकाएं और दूरस्थ आकाशगंगाओं को देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
रमेश केवल खगोलीय तस्वीरें ही नहीं खींचते, बल्कि विज्ञान के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे स्कूलों और कॉलेजों में विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों और युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ रहे हैं। इसके अलावा चर तारों और एक्सोप्लैनेट ट्रांजिट से जुड़े अवलोकनों का डेटा भी एकत्रित कर वैज्ञानिक अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं।
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने रमेश की उपलब्धियों को जिले के लिए गौरव बताया है। वहीं जिला प्रशासन अब होटलों और होमस्टे में आने वाले पर्यटकों को टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी से जोड़कर वैज्ञानिक पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है। रमेश भद्री की कहानी यह साबित करती है कि नवाचार, विज्ञान और पर्यटन का संगम पहाड़ों में रोजगार और रिवर्स माइग्रेशन की नई राह खोल सकता है।




