IIT Roorkee and UP Government Launch Carbon Credit Farming Model to Boost Farmers’ Income
रुड़की, 10 दिसंबर 2025। देशभर के किसानों के लिए एक बड़े बदलाव का रास्ता खुल गया है। आईआईटी रुड़की और उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलकर ऐसा कार्बन क्रेडिट मॉडल शुरू किया है, जो खेती को सिर्फ उत्पादन का नहीं बल्कि अतिरिक्त आय का नया स्रोत बना देगा। इस मॉडल के तहत किसान अपनी जमीन में जमा कार्बन की मात्रा के आधार पर कार्बन क्रेडिट कमाएंगे और इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर सीधे बैंक खाते में धन प्राप्त करेंगे। सरल शब्दों में—मिट्टी में जितना ज्यादा कार्बन, उतनी ज्यादा किसानों की कमाई।
इस कार्बन क्रेडिट मॉडल में किसानों को खेती के कुछ पर्यावरण-संरक्षक तरीके अपनाने होंगे—जैसे कम जुताई, फसल अवशेष न जलाना, जैविक खाद का उपयोग, कवर क्रॉपिंग और खेतों में पेड़ लगाना। इन तकनीकों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, कार्बन जमीन में स्थिर होगा और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा। आईआईटी रुड़की इन परिवर्तनों को डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से मापेगा, जिसके आधार पर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कार्बन क्रेडिट तैयार किए जाएंगे।
खास बात यह है कि क्रेडिट की बिक्री से होने वाली कमाई का पूरा लाभ किसानों को मिलेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि खेती की लागत कम करते हुए किसानों की आमदनी को स्थायी तरीके से बढ़ाएगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने इसे किसानों को जलवायु संरक्षण में भागीदार बनाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। जबकि परियोजना प्रमुख प्रो. ए.एस. मौर्य का कहना है कि यह सिर्फ कार्बन व्यापार नहीं, बल्कि मिट्टी सुधार और टिकाऊ कृषि की दिशा में बड़ा परिवर्तन है। उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विभाग भी इसे राज्य के किसानों के लिए भविष्य बदलने वाली पहल मान रहा है।
सहारनपुर मंडल से होगी शुरुआत
कार्बन क्रेडिट मॉडल की शुरुआत सहारनपुर मंडल से की जा रही है, जहां मिट्टी और फसली पैटर्न के कारण कार्बन संचयन की उच्च क्षमता है। आईआईटी रुड़की किसानों को अंतरराष्ट्रीय कार्बन मार्केट से जोड़ने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा, ताकि उन्हें उचित मूल्य और स्थायी आय सुनिश्चित हो सके।




