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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > देवलसारी: जहां मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व बना मिसाल
उत्तराखंड

देवलसारी: जहां मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व बना मिसाल

Web Editor
Last updated: 2026/01/01 at 4:38 AM
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3 Min Read
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Devalsari Sets an Example of Human–Wildlife Coexistence in Uttarakhand

 

देवलसारी, 1 january 2026: गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों से जूझ रहे उत्तराखंड के लिए देवलसारी रेंज उम्मीद की रोशनी है। टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक की यह रेंज केवल जैव विविधता के लिए नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलित रिश्ते के लिए भी जानी जाती है। सात हजार की आबादी और 13 वन पंचायतों वाले इस क्षेत्र में आज तक गुलदार या भालू द्वारा किसी मानव की जान लेने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई—जबकि आसपास के इलाकों में ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
यह उपलब्धि संयोग नहीं लगती। विशेषज्ञ इसे अध्ययन योग्य उदाहरण मानते हैं, वहीं ग्रामीण इसे आस्था और सामूहिक चेतना से जोड़ते हैं। व्यवहारिक तौर पर देखें तो यहां पलायन नगण्य है। लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं, जिससे गांवों में मानवीय गतिविधि निरंतर बनी रहती है। नतीजा—जंगल, खेत और बस्तियों के बीच टकराव के बजाय तालमेल। मिश्रित वनों, जीवंत जलस्रोतों और संतुलित फूड-चेन ने भी संघर्ष की संभावनाओं को सीमित किया है।
ग्रामीण स्वीकारते हैं कि कभी-कभार मवेशियों को नुकसान हुआ, लेकिन इंसानों पर हमला नहीं। सामूहिक सतर्कता, प्रकृति के प्रति सम्मान और गांवों की आबादी—यही देवलसारी की सुरक्षा कवच है। यह इलाका बताता है कि समाधान जंगल हटाने में नहीं, व्यवहार सुधारने और सह-अस्तित्व अपनाने में है।
बाक्स | देवलसारी रेंज की वन पंचायतें
बंगशील, मोलधार, तेवा, पूंतड, ठीक्क, भुइंयापानी, किंसु, पापरा, मुंगलोडी, डिगोनी, सिरस, बुटकोट, खेडा
कोट
“मेरी उम्र 61 साल है। यहां कभी गुलदार ने आदमी को निवाला बनाया—ऐसा मैंने नहीं सुना। बुजुर्ग इसे कोणेश्वर महादेव की कृपा मानते हैं। हां, मवेशियों को कभी-कभार नुकसान हुआ है।”
— खेम चंद्र, ग्राम बंगशील
“मैं यहीं पैदा हुआ, 51 बसंत देख लिए। गांव आबाद हों तो संघर्ष की गुंजाइश ही नहीं रहती।”
— गोविंद सिंह, होम-स्टे संचालक, ग्राम बंगशील
“यह जैव विविधता से भरपूर मिश्रित वन है। फूड-चेन संतुलित है, जलस्रोत काफी हद तक जीवित हैं। इसलिए क्षेत्र मानव–वन्यजीव संघर्ष से अब तक बचा रहा है।”
— अरुण गौड, नेचर गाइड, देवलसारी
बाक्स | वर्ष 2025 में वन्यजीव हमले (उत्तराखंड)
वन्य जीव.  मृत.   जख्मी
गुलदार.  16.       99
बाघ.        12.    05
भालू.     08.       106
देवलसारी का अनुभव बताता है—संतुलन, सतर्कता और सम्मान से सह-अस्तित्व संभव है।

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TAGGED: Devalsari range in Tehri Garhwal shows a rare model of human–wildlife coexistence where leopards and bears have never claimed a human life, highlighting the role of balanced ecosystems and active villages.
Web Editor January 1, 2026
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साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

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