By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्पोर्ट्स
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो न्यूज़
Search
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Reading: देवलसारी: जहां मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व बना मिसाल
Share
Notification Show More
Latest News
उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने सिंह बिसेन
उत्तराखंड
उत्तराखंड में अग्निवीरों को लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट
उत्तराखंड
आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
उत्तराखंड
निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड
धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी
उत्तराखंड
Aa
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Aa
  • पर्यटन
  • राजनीती
Search
  • उत्तराखंड
  • करियर
  • राजनीती
  • पर्यटन
Follow US
  • Advertise
© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs
Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > देवलसारी: जहां मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व बना मिसाल
उत्तराखंड

देवलसारी: जहां मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व बना मिसाल

Web Editor
Last updated: 2026/01/01 at 4:38 AM
Web Editor
Share
3 Min Read
SHARE

Devalsari Sets an Example of Human–Wildlife Coexistence in Uttarakhand

 

देवलसारी, 1 january 2026: गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों से जूझ रहे उत्तराखंड के लिए देवलसारी रेंज उम्मीद की रोशनी है। टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक की यह रेंज केवल जैव विविधता के लिए नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलित रिश्ते के लिए भी जानी जाती है। सात हजार की आबादी और 13 वन पंचायतों वाले इस क्षेत्र में आज तक गुलदार या भालू द्वारा किसी मानव की जान लेने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई—जबकि आसपास के इलाकों में ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
यह उपलब्धि संयोग नहीं लगती। विशेषज्ञ इसे अध्ययन योग्य उदाहरण मानते हैं, वहीं ग्रामीण इसे आस्था और सामूहिक चेतना से जोड़ते हैं। व्यवहारिक तौर पर देखें तो यहां पलायन नगण्य है। लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं, जिससे गांवों में मानवीय गतिविधि निरंतर बनी रहती है। नतीजा—जंगल, खेत और बस्तियों के बीच टकराव के बजाय तालमेल। मिश्रित वनों, जीवंत जलस्रोतों और संतुलित फूड-चेन ने भी संघर्ष की संभावनाओं को सीमित किया है।
ग्रामीण स्वीकारते हैं कि कभी-कभार मवेशियों को नुकसान हुआ, लेकिन इंसानों पर हमला नहीं। सामूहिक सतर्कता, प्रकृति के प्रति सम्मान और गांवों की आबादी—यही देवलसारी की सुरक्षा कवच है। यह इलाका बताता है कि समाधान जंगल हटाने में नहीं, व्यवहार सुधारने और सह-अस्तित्व अपनाने में है।
बाक्स | देवलसारी रेंज की वन पंचायतें
बंगशील, मोलधार, तेवा, पूंतड, ठीक्क, भुइंयापानी, किंसु, पापरा, मुंगलोडी, डिगोनी, सिरस, बुटकोट, खेडा
कोट
“मेरी उम्र 61 साल है। यहां कभी गुलदार ने आदमी को निवाला बनाया—ऐसा मैंने नहीं सुना। बुजुर्ग इसे कोणेश्वर महादेव की कृपा मानते हैं। हां, मवेशियों को कभी-कभार नुकसान हुआ है।”
— खेम चंद्र, ग्राम बंगशील
“मैं यहीं पैदा हुआ, 51 बसंत देख लिए। गांव आबाद हों तो संघर्ष की गुंजाइश ही नहीं रहती।”
— गोविंद सिंह, होम-स्टे संचालक, ग्राम बंगशील
“यह जैव विविधता से भरपूर मिश्रित वन है। फूड-चेन संतुलित है, जलस्रोत काफी हद तक जीवित हैं। इसलिए क्षेत्र मानव–वन्यजीव संघर्ष से अब तक बचा रहा है।”
— अरुण गौड, नेचर गाइड, देवलसारी
बाक्स | वर्ष 2025 में वन्यजीव हमले (उत्तराखंड)
वन्य जीव.  मृत.   जख्मी
गुलदार.  16.       99
बाघ.        12.    05
भालू.     08.       106
देवलसारी का अनुभव बताता है—संतुलन, सतर्कता और सम्मान से सह-अस्तित्व संभव है।

You Might Also Like

उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने सिंह बिसेन

उत्तराखंड में अग्निवीरों को लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट

आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 

निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज

धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी

TAGGED: Devalsari range in Tehri Garhwal shows a rare model of human–wildlife coexistence where leopards and bears have never claimed a human life, highlighting the role of balanced ecosystems and active villages.
Web Editor January 1, 2026
Share this Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
Previous Article एईबीएएस गुड गवर्नेंस की दिशा में महत्वपूर्ण कदम :जस्सुभाई
Next Article पर्यावरण के साथ रोज़गार की बहार 
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM-1.mp4
https://himalayakiawaj.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Video-2025-04-22-at-7.39.16-PM.mp4

Stay Connected

100 Followers Like
100 Followers Follow
100 Followers Follow
100 Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow
- Advertisement -
Ad imageAd image

Latest News

उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने सिंह बिसेन
उत्तराखंड October 12, 2026
उत्तराखंड में अग्निवीरों को लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट
उत्तराखंड October 12, 2026
आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
उत्तराखंड October 12, 2026
निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
उत्तराखंड October 11, 2026

Recent Posts

  • उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने सिंह बिसेन
  • उत्तराखंड में अग्निवीरों को लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट
  • आपदा में दबे कल्पकेदार मंदिर की खुदाई में जुटे ग्रामीण 
  • निगरानी ग्रिड बनाने में दक्ष हो रहे जांबाज
  • धार्मिक पर्यटन को मिली नई पहचान: धामी

साथियों, ये है हिमालय की आवाज. आप सोच रहे होंगे कि इतने पोर्टल के बीच एक और पोर्टल. इसमें क्या अलग है. यूं तो इसमें भी खबर ही होंगी, लेकिन साथ ही होगी हिमालय की आवाज यानी अपनी माटी, अपने गांव गली और चौक की बात. जल-जंगल और जमीन की बात भी. पहाड़ के विकास के लिए हम दमदार आवाज बनेंगे. आप सभी शुभचिंतकों के सहयोग का आकांक्षी. : किरण शर्मा, संस्‍थापक

Most Viewed Posts

  • पहाड़ के स्वाद ने पार किया छह करोड़ का आंकड़ा, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना नया बाजार (11,479)
  • अब एआई और रोबोटिक्स सीखेंगे उत्तराखंड के स्कूली बच्चे (9,723)
  • क्यूआर कोड से मिलेगी कुंभ की पूरी जानकारी (9,322)
  • 300 रुपये के लिए वृद्ध दंपती समेत तीन को पेचकस से गोदा, मौत (8,937)
  • दुनियाभर में होगी उत्तराखंड के सेब की ब्राडिंग  (8,758)
Himalaya Ki AwajHimalaya Ki Awaj
Follow US

© 2023 Himalaya Ki Awaj. All Rights Reserved. | Designed By: Tech Yard Labs

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?