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Himalaya Ki Awaj > Blog > उत्तराखंड > आकाश गंगा का रहस्य सुलझाने के करीब वैज्ञानिक 
उत्तराखंड

आकाश गंगा का रहस्य सुलझाने के करीब वैज्ञानिक 

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Last updated: 2026/03/26 at 2:30 AM
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ARIES Nainital Scientists Discover Magnetic Field Role in Star Formation

देहरादून, 26 March 2026 : उत्तराखंड के नैनीताल स्थित आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने आकाशगंगा (Milky Way) के पास मौजूद आणविक बादलों में तारों के बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले ‘मैग्नेटिक फील्ड’ का रहस्य उजागर किया है। यह खोज इस मायने में खास है कि अब तक तारे बनने की प्रक्रिया को मुख्य रूप से गुरुत्वाकर्षण से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन इस अध्ययन ने एक नया आयाम जोड़ दिया है।
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि तारों का जन्म केवल गैस के गुरुत्वाकर्षण से संकुचित होने का परिणाम नहीं है, बल्कि चुंबकीय क्षेत्र इस पूरी प्रक्रिया को संतुलित और नियंत्रित करता है। यानी ब्रह्मांड में तारे बनने की गति पर एक अदृश्य ‘ब्रेक सिस्टम’ भी काम करता है।
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 104 सेंटीमीटर टेलीस्कोप और इमेजिंग पोलारिमीटर जैसे उन्नत उपकरणों का इस्तेमाल किया। उन्होंने दूरस्थ तारों से आने वाली रोशनी का विश्लेषण किया। जब यह रोशनी गैस और धूल के बादलों से गुजरती है, तो उसकी दिशा में बदलाव आता है। इसी बदलाव को मापकर वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक फील्ड की दिशा और ताकत का नक्शा तैयार किया।
अध्ययन में दो प्रमुख आणविक बादलों—L1604 और L121—का विश्लेषण किया गया। L1604 एक घना बादल है, जहां तारे बनने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है, जबकि L121 में चुंबकीय क्षेत्र अधिक मजबूत और व्यवस्थित पाया गया, जिससे वहां तारे बनने की गति धीमी है। इससे स्पष्ट होता है कि जहां मैग्नेटिक फील्ड मजबूत होता है, वहां तारा निर्माण नियंत्रित रहता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, बादलों के बाहरी हिस्सों में चुंबकीय क्षेत्र इतना प्रभावी होता है कि वह गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करता है, जबकि अंदरूनी हिस्सों में धीरे-धीरे गुरुत्वाकर्षण हावी होकर नए तारों के जन्म की प्रक्रिया शुरू करता है।
यह खोज न केवल दो बादलों तक सीमित है, बल्कि पूरे ब्रह्मांड में तारा निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए एक नई वैज्ञानिक दिशा प्रदान करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये आणविक बादल अब एक “प्राकृतिक प्रयोगशाला” की तरह हैं, जहां ब्रह्मांड की मूलभूत शक्तियों को समझा जा सकता है।

 

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज
इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में तारे किस गति से और किन परिस्थितियों में बनते हैं। यदि चुंबकीय क्षेत्र न हो, तो गैस बहुत तेजी से तारे बना सकती है, जिससे आकाशगंगा का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में यह खोज बताती है कि मैग्नेटिक फील्ड ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

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TAGGED: offering new insights into space science and cosmic balance., Scientists at ARIES Nainital uncover how magnetic fields control star formation in the Milky Way
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