Uttarakhand Sets New LPG SOP, 32% Quota for Restaurants and Dhabas
देहरादून, 3 April 2026 । उत्तराखंड सरकार ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। इसके तहत रेस्टोरेंट, ढाबों और पर्यटन से जुड़े प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में कोटा निर्धारित किया गया है, ताकि आपूर्ति को संतुलित और पारदर्शी बनाया जा सके।
सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि संशोधित एसओपी के तहत विभिन्न उपभोक्ता वर्गों की दैनिक जरूरतों का आकलन कर सिलेंडरों का आवंटन तय किया गया है। नई व्यवस्था में रेस्टोरेंट और ढाबों को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हुए 2000 सिलेंडर प्रतिदिन यानी 32 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है।
पर्यटन आधारित इकाइयों—जैसे होटल और रिजॉर्ट—के लिए 1500 सिलेंडर (24 प्रतिशत) आवंटित किए गए हैं। वहीं सरकारी गेस्ट हाउसों के लिए 300 सिलेंडर यानी पांच प्रतिशत कोटा तय किया गया है। इसके अलावा डेयरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट, पेइंग गेस्ट सुविधाओं वाले छात्रावास, होम-स्टे और स्वयं सहायता समूहों के लिए 200-200 सिलेंडर (तीन-तीन प्रतिशत) निर्धारित किए गए हैं।
सरकार ने सामाजिक आयोजनों और औद्योगिक क्षेत्रों को भी ध्यान में रखते हुए अलग प्रावधान किए हैं। विवाह समारोहों के लिए 660 सिलेंडर (10 प्रतिशत) और फार्मास्यूटिकल, अस्पताल, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, रसायन सहित अन्य प्राथमिकता वाले उद्योगों के लिए 1250 सिलेंडर (20 प्रतिशत) तय किए गए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत प्रतिदिन कुल 6310 व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस एसओपी से गैस आपूर्ति में पारदर्शिता आएगी और विभिन्न क्षेत्रों में मांग के अनुसार संतुलित वितरण संभव हो सकेगा, जिससे खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बाक्स: जिलेवार कोटा भी तय
सचिव आनंद स्वरूप के अनुसार, जनपदवार गैस कनेक्शनों की संख्या के आधार पर कोटा निर्धारित किया गया है। देहरादून को सर्वाधिक 31 प्रतिशत आवंटन दिया गया है, जबकि हरिद्वार और नैनीताल को 13-13 प्रतिशत हिस्सा मिला है। ऊधमसिंह नगर को 9 प्रतिशत, चमोली को 6 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग को 5 प्रतिशत कोटा दिया गया है।
इसी क्रम में टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा को 4-4 प्रतिशत, पिथौरागढ़ को 3 प्रतिशत तथा बागेश्वर और चंपावत को 2-2 प्रतिशत आवंटन निर्धारित किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस जिलेवार वितरण प्रणाली से आपूर्ति में संतुलन बनेगा और जरूरतमंद क्षेत्रों तक समय पर गैस उपलब्ध हो सकेगी।




